लखीमपुर में किसानों को कुचलने के मामले में मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा की जेल से हुई रिहाई

आशीष मिश्रा इस केस में हत्या के मामले में आरोपी हैं. आशीष मिश्रा की जमानत का आदेश यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन 10 फरवरी को आया था और आज 15 फरवरी की जमानत हुई है. 

लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर (Lakhimpur Farmers Killing Case) में किसानों को कुचलने के मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) की मंगलवार को जेल से रिहाई हो गई.वह एक SUV में जेल के पिछले गेट से बाहर निकला, जो कि दूसरे कैदियों के लिए सामान्‍य प्रक्रिया नहीं है. आशीष के वकील अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने तीन-तीन लाख रुपये की दो sureties मांगी है हालांकि शहर छोड़ने को लेकर कोई बंदिश नहीं लगाई है.  निचले कोर्ट द्वारा इनकार किए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्‍ताह आशीष की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था.   

 आशीष मिश्रा की जमानत का आदेश यूपी में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन 10 फरवरी को आया था और आज 15 फरवरी की जमानत हुई है. आशीष मिश्रा की जमानत का आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए थे. कोर्ट ने हत्यारोपी के घटनास्थल पर मौजूद होने की पुलिसिया कहानी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए थे.इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस जांच को खारिज कर दिया था. अदालत ने कहा था कि एफआईआर में आशीष मिश्रा को फायरिंग करने वाला बताया गया, लेकिन किसी को भी गोली नहीं लगी. कोर्ट ने कहा कि वाहन चालक को प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए उकसाने वाला बताया गया, लेकिन चालक और अन्य को प्रदर्शनकारियों ने मार डाला.

हाईकोर्ट ने धारा 144 के बावजूद हजारों की भीड़ जुटने पर भी जिला  प्रशासन पर सवाल उठाए. हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस कहानी मानें कि हजारों लोग जमा हो गए थे तो इस बात की आशंका भी हो सकती है कि चालक ने खुद को बचाने के लिए वाहन को तेज करने की कोशिश की जिसके कारण घटना हुई.

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि आशीष मिश्रा ने आंदोलनकारी किसानों को कुचलने के लिए वाहन के चालक को उकसाया. हालांकि, वाहन में सवार दो अन्य लोगों के साथ चालक को प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीट कर मार डाला था. जांच के दौरान आरोपी को नोटिस जारी किया गया और वह जांच अधिकारी के सामने पेश हुआ. यह साफ है कि चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है. ऐसे हालात में, कोर्ट का विचार है कि आवेदक जमानत पर रिहा होने का हकदार है. निजी मुचलके और संबंधित अदालत से तय नियम शर्तों के साथ समान राशि के दो भरोसेमंद जमानतदारों के साथ शर्तों पर रिहाई की जाए. 

वहीं, राजनीतिक दलों ने भी आशीष मिश्रा की जमानत को लेकर योगी सरकार और पुलिस की जांच पर सवाल उठाया था. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा था कि हत्यारोपी को जमानत मिलना सरकार और पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करने वाला है.किसान और सपा नेता तजिंदर सिंह विर्क का कहना है कि इतनी बड़ी साजिश में हत्यारोपी को जमानत मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है. दूसरी ओर निर्दोष किसान जेल में हैं, एसआईटी जांच में दोषी शख्स जमानत पर रिहा हो गया है. यह यूपी सरकार की लचर पैरवी का भी नतीजा है. आंदोलन खत्म होने के बाद भी हम लगातार केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी की मांग उठा रहे हैं. आशीष मिश्रा की रिहाई चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास हो सकता है.किसान नेता राकेश टिकैत ने एनडीटीवी से कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा जल्द अपील दायर करने के लिए दस्तावेज एकत्र कर रहा है. किसानों का दावा है कि पुलिस पर मामले को कमजोर करने के लिए दबाव डाला गया और इसके कारण आशीष मिश्रा को जमानत मिल गई. 

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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा था कि एक ओर किसानों को गाड़ी से कुचलने के आरोपी को जमानत मिल जाती है, वहीं तमाम लोगों को भेंस चोरी, गाड़ी चोरी के आरोप में जेल भेज दिया जाता है.आशीष मिश्रा ऐसे समय रिहा हुआ है जब बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव चल रहे हैं. दो चरण पूरे हो चुके हैं जबकि शनिवार को तीसरा चरण है. लखीमपुर खीरी में चौथे चरण 23 फरवरी को वोट डाले जाएंगे.गौरतलब हैं कि तीन अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के दौरान आठ लोगों की मौत हो गई थी. यह हिंसा तब हुई थी जब किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे.