
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने बुधवार को हिंदुत्व को लेकर एक टिप्पणी की. एक अंग्रेजी अखबार में छपे नोबल विजेता इकोनॉमिस्ट अमर्त्य सेन के एक लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि हिंदुत्व संविधान के सामाजिक न्याय और समानता के मूल्य के खिलाफ है.
ओवैसी ने एक ट्वीट में लिखा, 'हिंदुत्व हमारे संविधान के समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों के लिए विरोधाभासी है. ये अमूर्त सिद्धांत नहीं हैं, इनका अल्पसंख्यकों और हाशिये पर पड़े लोगों के जीवन पर वास्तविक प्रभाव पड़ना चाहिए. जो भी भारतीय इन मूल्यों को अपने दिल के करीब रखते हैं, उन्हें अपनी पूरी शक्ति के साथ इसका विरोध करना चाहिए.'

अमर्त्य सेन ने अपने इस लेख में लिखा है कि भारत में इतिहास और शासन की पद्धति को धीरे-धीरे बदला जा रहा है. उन्होंने अपने शीर्षक में कहा है कि जिस तरह भारत धीरे-धीरे ऑटोक्रेसी यानी निरंकुश शासन की तरफ बढ़ता जा रहा है, ऐसे में अहिंसक विरोध-प्रदर्शन ही सबसे मजबूत रास्ता है.
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इस लेख में उन्होंने लिखा है, 'वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार, भारत में कई स्कूलों किताबें दोबारा लिखी जा रही हैं, जिसमें इतिहस को बदला जा रहा है, इसमें मुस्लिम लोगों के योगदान को-कमतर या पूरी तरह नजरअंदाज-किया जा रहा है.'
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