
जिस दिल्ली शहर के मुख्यमंत्री रहे, आज उसी दिल्ली में किराए का मकान तलाश पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं अरविन्द केजरीवाल...
दरअसल दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद के कौशाम्बी में अपनी पत्नी के नाम पर आवंटित गिरनार अपार्टमेंट के फ्लैट में रहते थे, लेकिन दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद मजबूरी में उन्होंने दिल्ली में शिफ्ट होने का फैसला किया और आखिरकार सेंट्रल दिल्ली के तिलक लेन वाले घर में शिफ्ट हो गए। लेकिन, 14 फ़रवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद केजरीवाल को ये घर खाली करना था, चुनाव और बेटी की परीक्षा के चलते केजरीवाल ने फैसला किया कि वो इस सरकारी आवास का 85,000 रुपये महीने का किराया चुकाएंगे और बेटी की परीक्षा के बाद ये घर खाली कर देंगे।
फिर, जून का महीना आ गया और केजरीवाल ने घर खाली नहीं किया। कुछ लोगों ने उनके घर खाली न करने को लेकर उनके घर के बाहर प्रदर्शन भी किया।
इस बीच हाल ही में खबर मिली कि केजरीवाल 1-2 दिन में सरकारी आवास खाली करके पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार में शिफ्ट हो रहे हैं। लेकिन, सब कुछ तय होने के बाद ये मामला भी फंस गया क्योंकि ये घर कोई आम आदमी नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के लिए जो था।
असल में कुछ और भी वजह हैं, जिसकी वजह से अरविन्द केजरीवाल अपने परिवार के लिए किराए का मकान नहीं तलाश पा रहे हैं।
पहला, अरविन्द केजरीवाल को ध्यान रखना है कि जहां वो रहे वो जगह आसानी से पहुंचने लायक हो, साथ ही वहां के आसपास के लोग और माहौल ऐसा हो कि भीड़भाड़ होने पर लोगों को दिक्कत ना हो।
अरविन्द के परिवार में कुल छह सदस्य हैं इसलिए 3-4 कमरों का मकान अनिवार्य है।
बात ये भी है कि केजरीवाल पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ ही एक पार्टी के प्रमुख हैं, और प्रतिष्ठित नई दिल्ली विधान सभा से विधायक भी हैं, इसलिए उनको घर में ही एक ऑफिस भी रखना होगा जिसके लिए जगह होनी चाहिए। और सबसे बड़ी बात मकान ऐसा हो कि केजरीवाल को आलोचना का शिकार ना होना पड़े।
यहां याद रखना ज़रूरी है कि केजरीवाल के घर को लेकर विवाद पहले भी हो चुका है और वो भी अच्छा खासा तो अभी केजरीवाल के लिए मुश्किल समय है। एक तो हाल में पार्टी ने उम्मीद से खराब प्रदर्शन किया, पार्टी के भीतर और बाहर असंतोष भी है और ऊपर से घर ना मिल पाना उनके लिए बड़ी चिंता का सबब तो है ही।
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