
इलाहाबाद:
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्यभर के थानों में दर्ज प्राथमिकी दर्ज किए जाने के 24 घंटे के भीतर उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड हो जाएं।
आदेश देते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने हालांकि यह साफ कर दिया कि वैसे मामलों में जहां अपराध के पीड़ित की पहचान का खुलासा उचित नहीं हो सकता है उस संबंध में संबद्ध पुलिस अधीक्षक जरूरी कदम उठाएं।
यह आदेश अधिवक्ता शेखर अवस्थी की जनहित याचिका पर सुनाया गया। उन्होंने दावा किया था कि अपराध में आरोपी को उसके खिलाफ आरोप की प्रकृति के बारे में जानने का हक है ताकि वह अपनी स्वतंत्रता की रक्षा कर सके लेकिन ऐसा पुलिस के प्राथमिकी में नामजद लोगों को उसकी प्रति सौंपने में पुलिस के अक्षम होने के मद्देनजर संभव नहीं हो पाता है। अदालत ने उपरोक्त निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
आदेश देते हुए मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने हालांकि यह साफ कर दिया कि वैसे मामलों में जहां अपराध के पीड़ित की पहचान का खुलासा उचित नहीं हो सकता है उस संबंध में संबद्ध पुलिस अधीक्षक जरूरी कदम उठाएं।
यह आदेश अधिवक्ता शेखर अवस्थी की जनहित याचिका पर सुनाया गया। उन्होंने दावा किया था कि अपराध में आरोपी को उसके खिलाफ आरोप की प्रकृति के बारे में जानने का हक है ताकि वह अपनी स्वतंत्रता की रक्षा कर सके लेकिन ऐसा पुलिस के प्राथमिकी में नामजद लोगों को उसकी प्रति सौंपने में पुलिस के अक्षम होने के मद्देनजर संभव नहीं हो पाता है। अदालत ने उपरोक्त निर्देशों के साथ जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया।
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