
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने शनिवार को कहा कि पिछल साल हुए बदलाव के बाद जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) में हालात सामान्य होने और विकास के एक नए युग की शुरुआत हुई है. उन्होंने शांति, प्रगति और सामाजिक सद्भाव को बदले परिप्रक्ष्य का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया. श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में सिन्हा ने कहा कि ‘‘यह बहुत दुख की बात है कि सांस्कृतिक समन्वयवाद की विरासत पर संप्रदायवाद का ग्रहण लग गया. हम फिर से इस विमर्श को बदलना चाहते हैं. हम विकास, शांति, प्रगति और सामाजिक सद्भाव को जम्मू कश्मीर के विमर्श का अटूट हिस्सा बनाना चाहते हैं. ''
उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए विकास, कल्याण और सामाजिक बदलाव के वास्ते एक बेहतर विकल्प मुहैया कराने को लेकर प्रतिबद्ध है. उन्होंने युवाओं से देश की प्रगति में हिस्सेदार बनने का आह्वान किया .
उप राज्यपाल ने पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और 35-ए के प्रावधानों को निरस्त किए जाने का हवाला देते हुए कहा, ‘‘2019 में संवैधानिक बदलाव को लागू करने के बाद केंद्र सरकार ने एक या दो नहीं बल्कि क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए 50 ऐतिहासिक फैसले किए. पिछले साल के बदलाव के कारण हालात सामान्य बनने और विकास के एक नए युग की शुरुआत हुई है. एक नयी यात्रा शुरू हुई है.''
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत' कथन का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद ने दशकों तक मानवता को परास्त किया, निहित हित वाले लोगों के हाथों में लोकतंत्र को नुकसान हुआ और नफरत फैलाने के लिए कश्मीरी लोगों का नरसंहार किया गया. सिन्हा ने कहा कि उनका प्रशासन उन सभी लोगों के साथ खड़ा है जो जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हालिया हमलों की पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा, ‘‘खतरे का सामना कर रहे स्थानीय स्व-सरकारों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को 25 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है. पुलिस-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं.'' सिन्हा ने कहा कि यह सरदार पटेल का सपना था कि समूचे भारत का अस्तित्व केवल राजनीतिक मानचित्र पर ही ना हो बल्कि समूचा भारत एक साथ आगे बढ़े और विकास व प्रगति के नए मील के पत्थर स्थापित करे.
(इनपुट भाषा से भी)
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