2 घंटे लंबी बातचीत चली अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और चीनी प्रेसिडेंट जिनपिंग के बीच

बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली वार्ता थी. बाइडेन ने आगाह किया है कि अगर अमेरिका चीन के प्रति नीति को लेकर आगे नहीं बढ़ेगा तो चीन से प्रतिस्पर्धा में अमेरिका बढ़त गंवा देगा और अपना हिस्सा भी गंवा देगा

2 घंटे लंबी बातचीत चली अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और चीनी प्रेसिडेंट जिनपिंग के बीच

बाइडेन ने जिनपिंग के साथ 2 घंटे फोन पर वार्ता की खुद जानकारी दी

वाशिंगटन:

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के बीच फोन पर दो घंटे लंबी बातचीत चली. बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली वार्ता थी. डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान अमेरिका और चीन के रिश्तों में आए बेहद तनाव के बीच इस वार्ता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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ट्रंप के कार्यकाल में व्यापार युद्ध के अलावा अमेरिका और चीन में सैन्य तनाव भी चरम पर पहुंच गया था. चीनी राष्ट्रपति से बुधवार रात लंबी बातचीत की जानकारी खुद बाइडे ने दी. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए यह बेहद असामान्य लंबी चर्चा थी. यहां तक कि शीर्ष नेताओं की आमने-सामने की मुलाकात भी एक घंटे तक नहीं चलती. बाइडेन ने आगाह किया कि अगर अमेरिका चीन के प्रति अपनी नीति को लेकर आगे नहीं बढ़ता है तो वो प्रतिस्पर्धा में अपना हिस्सा भी गंवा देगा.

फोन कॉल को लेकर बाइडेन ने जिनपिंग को मानवाधिकार, व्यापार और क्षेत्रीय दबदबे की नीति को लेकर कठघरे में खड़ा किया. ये मुद्दे तय कर सकते हैं कि दोनों महाशक्तियों के बीचे आगे रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ेंगे. जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के समय में दोनों देशों के रिश्तों में कटुता काफी बढ़ गई थी. व्यापार में टैरिफ वॉर के अलावा दोनों ने एक-दूसरे के शीर्ष नेताओं पर पाबंदी और वाणिज्य दूतावास बंद करने जैसे कदम भी उठाए.


बाइडेन पर भारी दबाव है कि वे चीन के साथ अपने रिश्तों में ट्रंप प्रशासन के दौरान लिए गए सख्त फैसलों पर कायम रहें. बाइडेन ने उप राष्ट्रपति रहने के दौरान जिनपिंग से मुलाकात की थी, तब बराक ओबामा अमेरिकी राष्ट्रपति थे.

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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा, राष्ट्रपति ने चीन के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत में चीन की दबदबे वाली और अनुचित आर्थिक नीतियों पर चिंता जाहिर की. हांग कांग में बल प्रयोग, शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघन और क्षेत्र में दबदबा कायम करने की चीन की नीतियों को लेकर सवाल उठाए. ताइवान का भी मुद्दा वार्ता के दौरान उठा.