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This Article is From Dec 19, 2023

ये 9 चीजें करती हैं मिर्गी के लक्षणों को ट्रिगर, आने लगते हैं बार-बार अटैक, जानें लक्षण, कारण और इलाज

Epilepsy Triggers: मिर्गी के ट्रिगर हर किसी के लिए अलग हो सकते हैं. यहां हम कुछ ट्रिगर्स के बारे में बता रहे हैं जिनसे आपको बचना चाहिए.

ये 9 चीजें करती हैं मिर्गी के लक्षणों को ट्रिगर, आने लगते हैं बार-बार अटैक, जानें लक्षण, कारण और इलाज
Epilepsy Triggers: ज्यादातर शराब का सेवन भी इसे ट्रिगर कर सकता है.

मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं. दौरे के ट्रिगर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं और मिर्गी से पीड़ित हर किसी को कुछ खास ट्रिगर नहीं होते हैं. हालांकि, कुछ सामान्य ट्रिगर्स में शामिल हैं जो मिर्गी अटैक्स को बढ़ा देते हैं. यहां कुछ ऐसे ट्रिगर्स के बारे में बताया गया है.

1. नींद की कमी: नींद की कमी या इर्रेगुलर स्लीप पैटर्न कुछ व्यक्तियों में दौरे का कारण बन सकता है.

2. तनाव और चिंता: भावनात्मक तनाव या चिंता कुछ लोगों में दौरे का कारण बन सकती है.

3. चमकती रोशनी या पैटर्न (फोटो सेंसिटिविटी): कुछ दृश्य उत्तेजनाएं, जैसे चमकती रोशनी या पैटर्न, कुछ व्यक्तियों में अटैक को ट्रिगर कर सकती हैं. इसे फोटोसेंसिटिव मिर्गी के नाम से जाना जाता है.

4. टिमटिमाती स्क्रीन: चमकती रोशनी के समान, तेजी से टिमटिमाती स्क्रीन, जैसे कि कुछ वीडियो गेम या कंप्यूटर प्रोग्राम पर कुछ लोगों के लिए ट्रिगर हो सकती हैं.

5. शराब और नशीली दवाओं का उपयोग: ज्यादातर शराब का सेवन और कुछ मनोरंजक दवाएं अटैक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं.

6. छूटी हुई दवाएं: मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति जो दवा ले रहे हैं, डोज न लेने या डाइट फॉलो न करने से अटैक का खतरा बढ़ सकता है.

7. हार्मोनल बदलाव: कुछ महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान हार्मोनल चेंजेस एक ट्रिगर हो सकता है.

8. बीमारी या बुखार: कुछ मामलों में बीमारी या बुखार अटैक्स को ट्रिगर कर सकता है खासकर बच्चों में.

9. कुछ फूड्स: असामान्य होते हुए भी कुछ लोगों में फूड ट्रिगर हो सकते हैं. हालांकि, यह सभी के लिए अलग-अलग हो सकता है.

मिर्गी को एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर माना जाता है जिसमें ब्रेन की अचानक और अनकंट्रोल इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के कारण अटैक्स होते हैं.

मिर्गी के लक्षण:

अटैक मिर्गी का प्राइमरी लक्षण हैं और वे अलग-अलग रूप में हो सकते हैं, जैसे टॉनिक-क्लोनिक अटैक और फोकल अटैक.

अटैक के दौरान लोगों को एब्नॉर्मल सेंसेशन, अनकंट्रोल एक्टिविटीज या चेतना की हानि का अनुभव हो सकता है.

मिर्गी के कारण:

मिर्गी के कारण कई हैं और इन्हें इडियोपैथिक (अज्ञात) या रोगसूचक के रूप में बांटा जा सकता है.

सिर की चोटें, ब्रेन ट्यूमर, इंफेक्शन और आनुवंशिक गड़बड़ी जैसे कारक मिर्गी में योगदान कर सकते हैं.

मिर्गी का इलाज:

दौरे को प्रबंधित करने और नियंत्रित करने के लिए आमतौर पर एंटीपीलेप्टिक दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं ब्रेन में इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को स्थिर करके काम करती हैं.

कुछ मामलों में दौरे शुरू करने के लिए जिम्मेदार ब्रेन टिश्यू को हटाने या बदलने के लिए सर्जरी की सिफारिश की जा सकती है.

अन्य ट्रीटमेंट ऑप्शन्स में ट्रीटमेंट शामिल है, जैसे कि केटोजेनिक डाइट, जिसमें फैट ज्यादा और कार्बोहाइड्रेट कम होता है.

रोकथाम:

हालांकि मिर्गी को हमेशा रोका नहीं जा सकता है, कुछ उपाय अटैक्स के जोखिम को कम कर सकते हैं:

निर्धारित दवाएं लगातार और डॉक्टर के बताए अनुसार लेनी चाहिए.

नींद की कमी, बहुत ज्यादा शराब का सेवन और तनाव जैसे ट्रिगर से बचें.

चोट को रोकने के लिए दौरे पड़ने की संभावना वाले लोगों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाना.

(डॉ. सत्यकाम बरुआ, वरिष्ठ सलाहकार, न्यूरोसर्जरी विभाग, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद)

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