4000 year old illness : ब्लड प्रेशर, थायराइड, स्ट्रेस, डिप्रेशन जैसी समस्याएं आधुनिक समय में होने वाली बीमारियां हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे आसपास जो बीमारियां मौजूद हैं, उन में से कुछ बीमारियों 100-200 साल नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी भी हैं. इन बीमारियों में कुष्ठ रोग शामिल है.
जर्नल PLOS ONE में 27 मई 2009 को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि राजस्थान के बालाथल स्थल पर मिले लगभग 2000 ईसा पूर्व, करीब 4,000 वर्ष पुराने कंकाल में कुष्ठ रोग से जुड़े घावों और अस्थि परिवर्तनों के प्रमाण मिले. रिसर्चर्स का कहना है कि इससे निष्कर्ष निकलता है कि भारत में 4000 साल पहले भी कुष्ठ रोग मौजूद था. ये खोज सिंधु सभ्यता के उत्तरकाल और प्राचीन भारत में इस बीमारी की मौजूदगी का महत्वपूर्ण सबूत मानी गई.
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अभी भी मिलते हैं कुष्ठ रोग के मामले
कुष्ठ रोग को एक पुरानी और लगभग खत्म हो चुकी बीमारी मानी जाती है. लेकिन अभी भी इसके कुछ मामले सामने आते रहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, आज भी भारत में हर साल कुष्ठ रोग के नए मामले सामने आते हैं. 2023-24 के दौरान देश में 1.07 लाख से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, जो वैश्विक मामलों का बड़ा हिस्सा हैं.
क्या है कुष्ठ रोग और किन अंगों को करता है प्रभावित?
दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा का कहना है कि कुष्ठ रोग एक संक्रामक बीमारी है, जो माइकोबैक्टीरियम लेप्रे नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. ये मुख्य रूप से स्किन, नसों और आंखों को प्रभावित करती है.
अगर समय रहते इसका इलाज न हो तो यह शरीर के अलग-अलग अंगों में स्थाई रूप से डैमेज भी कर सकती है. हालांकि, आज इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज किया जा सकता है. लेकिन इतिहास में इसके मरीजों को सामाजिक भेदभाव और अलगाव का सामना करना पड़ता था.
कुष्ठ रोग नहीं है कलंक
डॉक्टर भानु का कहना है कि कुष्ठ रोग को लेकर सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि उससे जुड़ा सामाजिक कलंक है. कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं या समाज के डर से इलाज नहीं कराते. जबकि आधुनिक चिकित्सा में मल्टी ड्रग थेरेपी के जरिए इसका सफल इलाज पूरी तरह से संभव है.
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