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This Article is From Dec 05, 2016

सरकारी दावों के बावजूद नोटबंदी से हरियाणा का मेवात बेहाल...

सरकारी दावों के बावजूद नोटबंदी से हरियाणा का मेवात बेहाल...
मेवात: सरकार दावा कर रही है कि बैंकों में स्थिति सुधर गई है. यह भी कि सहकारी बैंकों को पैसे दिए जा रहे हैं. लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त बताती है कि ख़ासकर गांव-देहात के इलाक़ों में लोग बुरी तरह परेशान हैं. कहीं पैसा नहीं आ रहा और कहीं आ रहा है तो इतना कम कि ज़्यादातर लोगों को ख़ाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

मेवात का शिकरावा गांव. यहां के सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के आगे सुबह पांच बजे से लाइन में लगे हैं गांव वाले. पैसे का इंतजार काफी लम्बा हो गया है. पिछली बार गुरुवार को पैसा बंटा था वो भी दो दो हजार. शाखा के असिस्टेंट मैनेजर मनोज मीणा को भी नहीं मालुम पैसा कब आएगा.
 

शिकरावा से निकल कर हम पहुंचे पिनगवां. यहां हमें देख सब ने घेर लिया. सबका अपना दर्द. बुजुर्ग कई कई घंटों से बैठे हैं. यहां तीन दिन बाद दो लाख पचास हजार आया है लेकिन सबको मिलना मुमकिन नहीं है. 82 टोकन बांट दिए गए हैं. मिलेंगे बस चार चार हजार. बाकी को खाली ही लौटना होगा.
 

अब घासेड़ा गांव की बारी. ये बैंक के भीतर पहुंचने में कामयाब रहे लेकिन निकले खाली हाथ. पैसा सोमवार बारह बजे आया और दो बजे खत्म हो गया.
 

मेवात जिले में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के 31 ब्रांच है. इन सबको मिलाकर करीब दो लाख खाते हैं. इलाके में साक्षरता दर काफी कम है. पलास्टिक मनी का किसी नें नाम तक नहीं सुना है. बैंक के रीजनल मैनेजर विनय बंसल का दावा है कि हरियाणा में सबसे ज्यादा कैश मेवात में आ रहा है. जब पूछा कि चौबिस हजार क्यों नहीं दे रहे तो जवाब की जगह सवाल करने लगे. सरकार भले कहे कि कैश की कमी नहीं है लेकिन दिल्ली से कुछ दूर निकलते ही सच्चाई सामने आ जाती है.

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