Kylian Mbappe, Spain vs France FIFA World Cup 2026: FIFA वर्ल्ड कप 2026 का पहला सेमीफाइनल फ्रांस के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. लगातार तीसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचने का सपना लेकर उतरी टीम को स्पेन ने 2-0 से हराकर बाहर का रास्ता दिखा दिया. डलास स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में फ्रांस के स्टार खिलाड़ियों से सजी आक्रमण पंक्ति पूरे 90 मिनट संघर्ष करती रही, लेकिन स्पेन की संगठित रक्षा के सामने उसे कोई रास्ता नहीं मिला.
चार साल पहले कतर में खेले गए फाइनल में किलियन एम्बाप्पे ने हैट्रिक लगाई थी, लेकिन टीम पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना से हार गई थी. इस बार कहानी अलग थी. इस बार न तो एम्बाप्पे अपना प्रभाव छोड़ पाए और न ही उनके साथ खेलने वाले ओस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिस और ब्रैडली बारकोला कोई बड़ा मौका बना सके.
पहले हाफ में ही दिख गया स्पेन का प्लान
स्पेन ने शुरुआत से ही एम्बाप्पे को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया. फ्रांस के कप्तान पहले हाफ में सिर्फ 14 बार ही गेंद को छू सके, जो मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों में सबसे कम था.
स्पेन के डिफेंडरों ने उन्हें लगातार घेरकर रखा. जैसे ही एम्बाप्पे गेंद लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते, उनके सामने तुरंत दो या तीन खिलाड़ी पहुंच जाते. इसका असर यह हुआ कि फ्रांस का सबसे बड़ा हथियार पूरे मुकाबले में लय नहीं पकड़ सका.
तीन शॉट... लेकिन कोई चुनौती नहीं
पूरे मैच में एम्बाप्पे सिर्फ तीन शॉट ही लगा पाए. इनमें से कोई भी स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन के लिए बड़ी चुनौती साबित नहीं हुआ. मैच खत्म होने तक उन्होंने कुल 34 बार गेंद को छुआ, लेकिन उसका असर स्कोरबोर्ड पर दिखाई नहीं दिया.
ड्रिब्लिंग भी नहीं आई काम
आमतौर पर अपनी रफ्तार और ड्रिब्लिंग के दम पर डिफेंडरों को पीछे छोड़ने वाले एम्बाप्पे इस मुकाबले में ऐसा नहीं कर सके. उन्होंने छह बार ड्रिब्लिंग की कोशिश की, लेकिन सिर्फ एक बार ही सफलता मिली. स्पेन की डिफेंस लगातार उनके रास्ते बंद करती रही और उन्हें खुली जगह नहीं मिल सकी. स्पेन के दबाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एम्बाप्पे ने मुकाबले के दौरान 14 बार गेंद पर अपना नियंत्रण खोया. फ्रांस की ओर से उनसे ज्यादा बार गेंद सिर्फ ओस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिस और स्पेन के लामिन यामल ने गंवाई.
फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह बिखरा
सेमीफाइनल से पहले फ्रांस टूर्नामेंट की दूसरी सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम थी. उसने छह मुकाबलों में 16 गोल किए थे और केवल अर्जेंटीना उससे आगे था, लेकिन स्पेन के खिलाफ वही टीम पूरे मैच में एक भी साफ मौका नहीं बना सकी. फ्रांस का एक्सपेक्टेड गोल्स (xG) सिर्फ 0.3 रहा, जिसमें भी सबसे बड़ा योगदान एम्बाप्पे का था. इसके बावजूद टीम का कोई खिलाड़ी स्पेन की रक्षापंक्ति को गंभीर चुनौती नहीं दे सका.
एम्बाप्पे के अलावा फ्रांस की पूरी अटैक लाइन फीकी रही. ओस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिस और ब्रैडली बारकोला पूरे मुकाबले में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे. तीनों खिलाड़ियों को स्पेन के डिफेंडरों ने लगातार दबाव में रखा, जिससे फ्रांस का आक्रमण कभी भी लय में नहीं आ पाया.
निराशा के बीच एम्बाप्पे को 86वें मिनट में येलो कार्ड भी देखना पड़ा. स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन गेंद उठाने के लिए झुके हुए थे, तभी एम्बाप्पे तेजी से उनकी ओर बढ़े. दोनों खिलाड़ियों की टक्कर हुई और रेफरी ने फ्रांस के कप्तान को चेतावनी दिखा दी.
क्वार्टर फाइनल के हीरो, सेमीफाइनल में बेअसर
सेमीफाइनल से पहले एम्बाप्पे शानदार फॉर्म में थे. मोरक्को के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उन्होंने टूर्नामेंट का अपना आठवां गोल दागा था और 77वें मिनट में मैदान से बाहर गए थे, लेकिन स्पेन के खिलाफ वही खिलाड़ी पूरे मुकाबले में संघर्ष करते नजर आए. स्पेन की अनुशासित रक्षापंक्ति ने उन्हें किसी भी समय खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और यही फ्रांस की हार की सबसे बड़ी वजहों में से एक साबित हुई.
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