गुरुद्वारे जाने वाले ज्यादातर लोगों ने कड़ा प्रसाद जरूर खाया होगा. घी, आटा और चीनी से बना यह गर्मागर्म प्रसाद स्वाद में जितना खास होता है, उतना ही खास इसका धार्मिक महत्व भी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसे कड़ा प्रसाद ही क्यों कहा जाता है? आखिर इसके नाम का मतलब क्या है? आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक बातें.
नाम में छिपी है बड़ी कड़ाही की कहानी
कई लोग सोचते हैं कि कड़ा प्रसाद में "कड़ा" शब्द किसी धार्मिक नियम या परंपरा से जुड़ा होगा, लेकिन असल वजह कुछ और है. दरअसल, पंजाब में बड़ी कड़ाही को 'कड़ाहा' कहा जाता है. पुराने समय में जब बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन या प्रसाद बनाया जाता था, तो उसे बड़े कड़ाहे में ही पकाया जाता था. इसी वजह से इस प्रसाद का नाम 'कड़ाहा प्रसाद' पड़ा. समय के साथ लोगों की बोलचाल में यह नाम छोटा होकर 'कड़ा प्रसाद' बन गया.
सिर्फ मिठाई नहीं, आशीर्वाद माना जाता है
सिख धर्म में कड़ा प्रसाद को सामान्य मिठाई की तरह नहीं देखा जाता. इसे गुरु का आशीर्वाद और कृपा का प्रतीक माना जाता है. गुरुद्वारों में मान्यता है कि कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ वापस नहीं जाना चाहिए. इसलिए अरदास के बाद सभी लोगों को कड़ा प्रसाद दिया जाता है.
कड़ा प्रसाद कैसे बनता है?
कड़ा प्रसाद बनाने के लिए ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं पड़ती, इसे बनाने में आमतौर पर चार मुख्य सामग्री इस्तेमाल होती हैं
- गेहूं का आटा
- देसी घी
- चीनी या गुड़
- पानी
इन सभी चीजों को सही मात्रा में मिलाकर बड़े कड़ाहे में पकाया जाता है. यही वजह है कि इसका स्वाद बेहद खास और अलग होता है.
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