Naraka Chaturdashi 2018: आज है नरक चतुर्दशी, जानें पूजा विधि, कथा और शुभ मुहूर्त

दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली (Choti diwali ) का पर्व मनाया जाता है. छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी व नरक चतुर्दथी के नाम से भी जाना जाता है.

Naraka Chaturdashi 2018: आज है नरक चतुर्दशी, जानें पूजा विधि, कथा और शुभ मुहूर्त

खास बातें

  • छोटी दिवाली को रूप चतुर्दशी व नरक चतुर्दथी के नाम से भी जाना जाता है.
  • कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है
  • मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन पूजन से दरिद्रता खत्म हो जाती है.

Happy Diwali 2018: दिवाली पर्व (Deepawali 2018) को बड़ी-भूम धाम से मनाया जाता है. दिवाली पर्व की तैयारियां काफी पहले से शुरू हो जाती हैं. क्योंकि दिवाली का पर्व 5 दिनों तक चलता है. धनतेरस (Dhanteras) से शुरू होकर भाईदूज (Bhai Dooj) तक इस त्योहार को मनाया जाता है. दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली कहा जाता है. इसे नर्क चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, नरक चौदस या या नर्का पूजा के नाम से जाना जाता है. इस साल दिवाली 7 नवंबर को है, तो छोटी दिवाली (Chhoti Diwali) 6 नवंबर को मनाई जाएगी. कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है.

 

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छोटी दिवाली पर किसकी की जाती है पूजा- Naraka Chaturdashi Puja:

छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी (Roop Chaudas or Naraka Chaturdashi) के दिन भी दिवाली की ही तरह पूजा-पाठ और दीप जलाए जाते हैं. लेकिन दोनों में जरा सा अंतर होता है. वह यह कि दिवाली पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है. वहीं, नरक चतुर्दशी के मौके पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है. इस दिन यमराज की पूजा कर अपने परिवार वालों के लिए नरक निवारण की प्रार्थना करते हैं. इसके साथ ही गलतियों से बचने के लिए उनसे माफी मांगी जाती है. नरक चतुर्दशी को मुक्ति पाने वाला पर्व भी कहा जाता है.

 

छोटी दिवाली व नरक चतुर्दशी की कथा- Choti Diwali, Naraka Chaturdashi katha:

नरक चतुर्दशी का ही एक नाम रूप चतुर्दशी भी है. नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है. माना जाता है कि कृष्ण का पूजन सौंदर्य की प्राप्ति कराता है. इस संदर्भ में रूप चतुर्दशी से जुड़ी एक कथा है. जिसके अनुसार काफी समय पहले हिरण्यगर्भ नाम का एक राज्य था. जिसमें एक योगी रहा करते थे. एक दिन योगीराज ने कृष्ण भगवान को पाने की इच्छा से समाधि ली और तपस्या करने लगे. इस तपस्या के दौरान उन्होंने कई परेशानियों का सामना किया. इस तपस्या के बाद उनकी दशा खराब हो गई. जब नारद जी योगीराज के पास पहुंचे और उन्होंने देखा कि योगीराज दुखी हैं, तो नारद ने उनके दुख का कारण पूछा. योगीराज ने नाराद से कहा कि भक्ति में लीन होने के चलते मेरा रूप विभत्स हो गया है. जिससे मैं चिंतित हूं. इस पर नारद ने उन्हें कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने को कहा. ऐसा करने पर वे फिर से रूप रत्न पा गए. इसलिए इस चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाने लगा. तब से छोटी दिवाली की पूजा का खास महत्व है.

 

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कैसे करें छोटी दिवाली की पूजा- Choti Diwali Puja Vidhi:

छोटी दिवाली यानि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठने का महत्व है. इस दिन तेल से नहाया जाता है. नहाने के पश्चात सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए. इसके बाद भगवान कृष्ण की अराधना की जाती है. पूजा के समय फल-फूल धूप जलाकर अर्चना करें. और शाम को घर की दहलीज पर और घर के बाथरूप में 5 या 7 दीप जलाएं. इस तरह से छोटी दिवाली में पूजा करें और अपने परिवार के लिए प्रार्थना करें.  ऐसा करने से आपके घर की दरिद्रता खत्म हो जाएगी और आपके घर में खुशीयों का महौल बना रहेगा.

यम पूजा का शुभ मुहूर्त - Yam Puja Shubh Muhurt

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सुबह: 6 नवंबर को 9:32 से 11:45 तक
दोपहर: 6 नवंबर को 12:05 से 1:22 तक
शाम: 6 नवंबर को 05:40 से 7:05 तक

 

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