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This Article is From Jul 04, 2018

LG vs दिल्‍ली सरकार: दिल्ली में नहीं चलेगी LG की मनमानी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बातें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार और LG के बीच राय में अंतर वित्तीय, पॉलिसी और केंद्र को प्रभावित करने वाले मामलों में होनी चाहिए. कोई फैसला लेने से पहले LG की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत.

LG vs दिल्‍ली सरकार: दिल्ली में नहीं चलेगी LG की मनमानी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 10 बातें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एलजी नहीं, दिल्ली सरकार है असली बॉस
नई दिल्ली:
  1. चीफ जस्टिस और दो अन्य न्यायमूर्तियों ने कहा, दिल्ली मंत्रिमंडल को सभी फैसलों की जानकारी उपराज्‍यपाल को देनी चाहिए, लेकिन हर मामले में उपराज्‍यपाल की सहमति ज़रूरी नहीं. इतना ही नहीं राज्य सरकार को बिना किसी दखल के काम करने की आज़ादी हो.
  2. चीफ जस्टिस ने कहा कि दिल्ली को राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता, इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला पहले ही आ चुका है. चीफ जस्टिस ने कहा कि हर फ़ैसले की जानकारी LG को दी जाए और उपराज्‍यपाल हर मामला राष्ट्रपति को न भेजें. हर मामले में सहमति ज़रूरी नहीं है.
  3. CJI व दो अन्य न्यायमूर्तियों ने कहा, भूमि, पुलिस और लॉ एंड ऑर्डर को छोड़कर, जो केंद्र का एक्सक्लूसिव अधिकार है, दिल्ली सरकार को अन्य मामलों में कानून बनाने और प्रशासन करने की इजाज़त दी जानी चाहिए.
  4. CJI व दो अन्य न्यायमूर्तियों ने कहा, LG सीमित सेंस के साथ प्रशासक हैं, वह राज्यपाल नहीं हैं, LG एक्समेंटिड क्षेत्रों को छोड़कर बाकी मामलों में दिल्ली सरकार की 'एड एंड एडवाइस' मानने के लिए बाध्य हैं.
  5. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं - संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि - पर गौर किया है. 
  6. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि लोकतंत्र में रियल पावर चुने हुए प्रतिनिधियों में होनी चाहिए. विधायिका के प्रति वो जवाबदेह हैं, लेकिन दिल्ली के स्पेशल स्टेट्स को देखते हुए बैलेंस बनाना जरूरी है. मूल कारक दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है. उन्‍होंने कहा कि LG को ये दिमाग में रखना चाहिए कि वो नहीं बल्कि कैबिनेट है जो फैसले लेती है. 
  7. जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि दिल्‍ली सरकार द्वारा LG को दी गई 'एड एंड एडवाइस' पर बाध्यकारी है. 
  8. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि उपराज्‍यपाल की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों कि जानकारी देनी होगी. इतना ही नहीं चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है इसलिए मंत्रिपरिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है.
  9. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार और LG के बीच राय में अंतर वित्तीय, पॉलिसी और केंद्र को प्रभावित करने वाले मामलों में होनी चाहिए. कोई फैसला लेने से पहले LG की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत. छोटे-छोटे मामलों में मतभेद ना हो. राय में अंतर होने पर राष्ट्रपति को मामला भेजें उपराज्‍यपाल.
  10. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उप राज्यपाल को स्वतंत्र अधिकार नहीं सौंपे गए हैं. उप राज्यपाल को यांत्रिकी तरीके से कार्य नहीं करना चाहिए और ना ही उन्हें मंत्रिपरिषद के फैसलों को रोकना चाहिए. 
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