
Kanya pujan niyam : 9 दिन तक चलने वाला नवरात्रि पर्व का समापन देवी सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ होता है. कन्या पूजन का नवरात्रि में विशेष महत्व है. क्योंकि कन्याओं को देवी मां का स्वरूप माना जाता है. ऐसे में इनकी पूजा करने और भोज कराने से सीधे देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कन्या पूजन में 9 कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है. साथ ही एक बालक को भी पूजा में शामिल किया जाता है, जिसे बटुक या लंगूर कहते हैं. बिना इनके कन्या पूजन अधूरी मानी जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कन्या पूजन में क्यों एक लंगूर को आमंत्रित किया जाता है...
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कन्या पूजन में क्यों शामिल किया जाता है लंगूर - Why is Langur included in Kanya Poojan?
पौराणिक कथा के अनुसार, देवी मां ने वरदान दिया था उनके साथ भैरवनाथ की भी पूजा की जाएगी. बिना उनके पूजा अधूरी मानी जाएगी. देवी मां के साथ भैरव नाथ की पूजा करने से सुख-समृद्धि आएगी. ऐसी मान्यता है कि बाबा भैरव जहां विराजमान होते हैं, वहां किसी काम में बाधा नहीं आती है. बाबा भैरव नकारात्मक शक्तियों से लड़ने में मदद करते हैं. यही वजह है कि कन्या पूजन में एक बटुक को बुलाया जाता है, जिसे भैरवनाथ का सौम्य रूप माना जाता है.
कन्या पूजन के लिए बटुक न मिले तो क्या करें - What to do if you do not find a child for Kanya Pujan
अगर आपको कन्या पूजन के लिए कोई बटुक न मिले तो फिर आप एक थाली भैरव बाबा के नाम की निकाल दीजिए. फिर इस भोग को कुत्ते को खिला दीजिए. आपको बता दें कि कुत्ता भैरवनाथ की सवारी माना जाता है.
अष्टमी तिथि कन्या पूजन मुहूर्त - Ashtami Kanya pujan muhurat 2025
कन्या पूजन 5 अप्रैल को 11:59 से 12:49 तक किया जा सकता है. वहीं, नवमी के दिन कन्या पूजन के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस अवधि में आप कन्या पूजन करके मां का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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