Varuthini Ekadashi 2026 Vrat Ke Niyam: जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व माना गया है. यह वह प्रत्येक मास में दो बार और साल भर में कुल 24 बार पड़ता है. एकादशी व्रत का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जब यह वैशाख मास के कृष्णपक्ष में पड़ती है और वरुथिनी एकादशी कहलाती है. मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी व्रत को विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी पूरी कृपा बरसाते हैं. जिस पावन व्रत को करने से श्रीहरि जीवन से जुड़े सभी दुखों को दूर करके कामनाओं को शीघ्र ही पूरा करते हैं, आइए उस वरुथिनी एकादशी व्रत से जुड़े 11 जरूरी नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं.
1. वरुथिनी एकादशी व्रत को करने वाले साधक को व्रत से जुड़े नियमों का पाल एक दिन पूर्व संध्याकाल से ही प्रारंभ करना शुरु कर देना चाहिए और व्रत के दूसरे दिन पारण करने तक पूरी तरह से निभाना चाहिए.
2. भगवान विष्णु के लिए रखे जाने वाले एकादशी व्रत में अन्न का सेवन करना पूरी तरह से निषेध है, इसलिए इस व्रत में फलहार करें और एक दिन पूर्व संध्याकाल से चावल का सेवन न करें.
3. वरुथिनी एकादशी व्रत वाले दिन यदि संभव हो तो गंगा, गोदावरी आदि पवित्र जल तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए. यदि ऐसा न संभव हो पाए तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए.
4. वरुथिनी एकादशी व्रत वाले दिन साधक को सिर्फ तन से ही नहीं बल्कि मन से भी पवित्र होना चाहिए. इस दिन भूलकर भी अपने मन में किसी के लिए गलत विचार न लाएं.
5. वरुथिनी एकादशी व्रत का पुण्यफल पाने के लिए साधक को अपनी शारीरिक इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए व्रत का पारण करने तक पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
6. वरुथिनी एकादशी व्रत वाले दिन भूलकर भी चावल और तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. वरुथिनी एकादशी व्रत करने वाले साधक को पलंग की बजाय जमीन में शयन करना चाहिए.

7. वरुथिनी एकादशी का व्रत तब तक अधूरा है, जब तक आप इसके अगले दिन शुभ मुहूर्त में इसका विधि-विधान से पारण नहीं करते हैं.
8. हिंदू मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत वाले दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए इसे एक दिन पूर्व ही तोड़कर रख लेना चाहिए.
9. वरुथिनी एकादशी व्रत वाले दिन सिर्फ भगवान विष्णु की ही नहीं बल्कि उनके साथ माता लक्ष्मी की भी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.
10. हिंदू मान्यता के अनुसार वरुथिनी एकादशी व्रत का पुण्यफल पाने के लिए साधक को अपनी क्षमता के अनुसार किसी मंदिर के पुजारी या फिर जरूरमंद व्यक्ति को मौसमी फल, अन्न, वस्त्र और आदि का दान करना चाहिए.
11. वरुथिनी एकादशी व्रत करने वाले साधक को भूलकर कर किसी के साथ वाद-विवाद नहीं करना चाहिए और पूरे दिन अन्य कार्यों को करते हुए मन में श्री हरि के मंत्रों का जप करते रहना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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