Vaishakh Month 2026 Start And End Date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास के बाद वैशाख की शुरुआत होती है. सनातन परंपरा में यह मास जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार इस पावन मास में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा शीघ्र ही फलदायी मानी गई है. मान्यता है कि भगवान विष्णु के इस प्रिय मास में तमाम तीर्थो पर किए जाने वाले स्नान और दान आदि का फल महज जल का दान करने मात्र से हो जाता है. आइए जानते हैं कि वैशाख मास की कब शुरू होगा और इसका धार्मिक महत्व क्या है.
कब से लगेगा वैशाख मास? (Vaisakha Start Date)

हिंदू कैलेंडर के दूसरे महीने यानि वैशाख मास का संबंध विशाखा नक्षत्र से होता है, इसलिए इसे वैशाख मास के नाम से जाना जाता है. जिस वैशाख को माधव मास के नाम से भी जाना जाता है और जिस वैशाख मास से त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी, वह इस साल 03 मई 2026, शुक्रवार से प्रारंभ होकर 01 मई 2026, शुक्रवार को समाप्त होगा.
वैशाख मास का धार्मिक महत्व (Vaisakha Month Significance)

हिंदू मान्यता के अनुसार बेहद शुभ और पवित्र माना जाने वाला वैशाख मास भगवान विष्णु, भगवान श्री कृष्ण और धन की देवी माता लक्ष्मी की विशेष पूजा, जप, तप और व्रत के लिए समर्पित है. जिस विशाखा नक्षत्र के नाम पर इसे वैशाख मास के नाम से जाना जाता है, वह उसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं. यही कारण है कि इस पावन मास में धर्म-कर्म, स्नान-दान, जप-तप, व्रत और उपवास आदि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. मान्यता है कि वैशाख मास में किया गया जल तीर्थ में स्नान, गरीबों को किया गया दान और पूजा-तप का पुण्यफल कभी समाप्त नहीं होता है. यानि वैशाख मास में की गई पूजा अक्षय पुण्यदायी होती है. वैशाख मास में गंगा में स्नान करने मात्र से साधक के सभी दोष और पाप समाप्त हो जाते हैं.
वैशाख मास के नियम (Vaishakh Month Rules)
- वैशाख के महीने में साधक को सूर्योदय के बाद नहीं सोना चाहिए, बल्कि सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए.
- वैशाख के महीने में साधक को बहुत ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि केवल एक समय सात्विक भोजन ही करना चाहिए.
- वैशाख के महीने में कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए और न ही तेल-मालिश करना चाहिए.
- वैशाख के महीने में व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तन, मन और कर्म की पवित्रता को बनाए रखना चाहिए.

- वैशाख मास में प्रतिदिन साधक को श्री हरि की पूजा और कथा का श्रवण करना चाहिए.
- वैशाख मास में प्रतिदिन विष्णु प्रिया कहलाने वाली तुलसी जी की सेवा करते हुए संध्या के समय दीया जलाना चाहिए.
- वैशाख मास में यदि संभव हो तो प्याऊ बनवाना चाहिए या फिर पशु-पक्षियों के लिए जल का इंतजाम करना चाहिए.
- वैशाख मास में पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को जल, घड़ा, छाता, चप्पल, पंखा आदि का दान करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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