प्रतीकात्मक चित्र
सदियों से छत्तीसगढ़ रहस्यों और अबूझ पहेलियों का पिटारा रहा है। यहां का एक गांव भी इस धारणा को पूरी तरह चरितार्थ करता है। इस गांव का अनोखापन यह है कि यहां सभी प्रमुख त्योहार तय तिथि से एक सप्ताह पहले मना लिए जाते हैं।
यह गांव है धमतरी जिले का सेमरा (सी)। इस गांव में काफी जमाने से चार प्रमुख त्योहार हफ्ते भर पहले ही मना लेते हैं। ये त्योहार हैं- होली, पोला, हरेली और दिवाली।
...ताकि ग्राम देवता हों प्रसन्न
प्रचलित लोक-संस्कृति और परंपरा के अनुसार यहां त्योहारों को हफ्ते भर पहले इसलिए मनाया जाता है, ताकि ग्राम देवता प्रसन्न रहें। यही कारण है कि इस साल सारा देश जहां होली का त्योहार जहां 23 मार्च को मनायेगा, इस गांव में यह पर्व 18 मार्च को ही मना लिया जाएगा।
पौने दो सौ की आबादी वाले सेमरा गांव में मतभेद और मनभेद की भावना से परे हटकर ग्रामीण सैकड़ों वर्षो से इस अनोखी परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। तय तिथि से पहले त्योहारों को मनाने के बावजूद यहां के बुजुर्ग, युवा और बच्चों में खूब उत्साह रहता है।
कब शुरु हुई यह परंपरा किसी को नहीं पता
अब तक किसी ने भी अपने पूर्वजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा से मुंह नहीं मोड़ा है। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह कि इस पंरपरा की शुरुआत कब हुई, इससे गांववाले अनजान हैं।
गांववाले कहते हैं कि उनके पूर्वजों के समय में कुछ लोगों ने इस परंपरा की अवहलना की थी, तब गांव में अप्रिय घटना का खामियाजा भुगतना पड़ा। इस गांव में सिर्फ दशहरा ही पंचांग के अनुसार नियत तिथि को मनाया जाता है।
यह गांव है धमतरी जिले का सेमरा (सी)। इस गांव में काफी जमाने से चार प्रमुख त्योहार हफ्ते भर पहले ही मना लेते हैं। ये त्योहार हैं- होली, पोला, हरेली और दिवाली।
...ताकि ग्राम देवता हों प्रसन्न
प्रचलित लोक-संस्कृति और परंपरा के अनुसार यहां त्योहारों को हफ्ते भर पहले इसलिए मनाया जाता है, ताकि ग्राम देवता प्रसन्न रहें। यही कारण है कि इस साल सारा देश जहां होली का त्योहार जहां 23 मार्च को मनायेगा, इस गांव में यह पर्व 18 मार्च को ही मना लिया जाएगा।
पौने दो सौ की आबादी वाले सेमरा गांव में मतभेद और मनभेद की भावना से परे हटकर ग्रामीण सैकड़ों वर्षो से इस अनोखी परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं। तय तिथि से पहले त्योहारों को मनाने के बावजूद यहां के बुजुर्ग, युवा और बच्चों में खूब उत्साह रहता है।
कब शुरु हुई यह परंपरा किसी को नहीं पता
अब तक किसी ने भी अपने पूर्वजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा से मुंह नहीं मोड़ा है। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह कि इस पंरपरा की शुरुआत कब हुई, इससे गांववाले अनजान हैं।
गांववाले कहते हैं कि उनके पूर्वजों के समय में कुछ लोगों ने इस परंपरा की अवहलना की थी, तब गांव में अप्रिय घटना का खामियाजा भुगतना पड़ा। इस गांव में सिर्फ दशहरा ही पंचांग के अनुसार नियत तिथि को मनाया जाता है।
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