Sharad Purnima 2021: आश्विन पूर्णिमा व्रत तिथि, पूजा का समय और महत्व

Sharad Purnima: अश्विन माह में आने वाली पूर्णिमा पर चंद्रमा धरती के ज्यादा पास आ जाता है, जिसकी वजह से उसकी रोशनी में औषधीय गुण भी बढ़ जाते हैं. यही वजह है कि शरद पूर्णिमा के चांद को खीर का भोग लगाया जाता है और खीर भी रात भर खुले में रखी जाती है.

Sharad Purnima 2021: आश्विन पूर्णिमा व्रत तिथि, पूजा का समय और महत्व

Sharad Purnima 2021: साल 2021 में इस दिन है शरद पूर्णिमा, ऐसे करें पूजन, ये है महत्व

नई दिल्ली:

Sharad Purnima 2021: वैसे तो हर माह में पड़ने वाली पूर्णिमा की तिथि का महत्व होता है, लेकिन अश्विन माह में आने वाली पूर्णिमा शरद पूर्णिमा के नाम भी मनाई जाती है. कोजागरी और कुन्नर भी इसी पूर्णिमा के अलग-अलग नाम हैं. इस पूर्णिमा को फसलों के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. माना जाता है कि अश्विन माह में आने वाली पूर्णिमा पर चंद्रमा धरती के ज्यादा पास आ जाता है,जिसकी वजह से उसकी रोशनी में औषधीय गुण भी बढ़ जाते हैं. यही वजह है कि शरद पूर्णिमा के चांद को खीर का भोग लगाया जाता है और खीर भी रात भर खुले में रखी जाती है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के गुण दूध में समाकर उसे औषधीय बना देंगे. इस साल शरद पूर्णिमा आज 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है. पूर्णिमा रात सात बजे से शुरू होगी और अगले दिन सुबह आठ बजकर 20 मिनट तक जारी रहेगी.

अश्विन या शरद पूर्णिमा का महत्व

शरद पूर्णिमा के चांद से कई चमत्कार जुड़े होने की मान्यता है. माना जाता है कि इस दिन के चांद में 16 गुण मिले होते हैं. ये गुण अमृत सा सुख देते हैं. जो दूध में मिलकर कई रोगों को दूर करते हैं. कुछ स्थानों में शरद पूर्णिमा पर भगवान श्री कृष्ण के पूजन का भी महत्व है. इस मान्यता के साथ कि भगवान कृष्ण शरद पूर्णिमा पर ही राधा और अन्य गोपियों के साथ महारास यानि कि प्रेम का दिव्य नृत्य करते हैं.

मां लक्ष्मी की उत्पत्ति


माता लक्ष्मी का जन्म भी अश्विन पूर्णिमा पर ही माना जाता है. पुराणों में कहा गया है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी तिथि पर माता लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस पूर्णिमा को धनदायक भी माना जाता है. कोजागरी पूर्णिमा नाम पड़ने के पीछे भी किंवदंती है. ये माना जाता है कि इस पूर्णिमा पर पूरी रात मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और यहीं भ्रमण करती हैं, जो भक्त पूरी रात जागकर भजन कीर्तन करते हैं, उन पर मां की खास कृपा होती है, इसलिए इसे कोजागरी नाम दिया गया.

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ओडिशा में कुंवारी कन्याएं जीवनसाथी की आस में शरद पूर्णिमा का व्रत रखती है. इस खास मान्यता के चलते ओडिशा में ये कुमार पूर्णिमा के नाम से जानी जाती है.