Ravi Pradosh Vrat Ke Labh: सनातन परंपरा में हर महीने कृष्ण और शुक्लपक्ष में पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि अत्यंत ही शुभ और कल्याणदायी मानी गई है क्योंकि यह देवाधिदेव महादेव की पूजा, व्रत एवं उपवास का पुण्यफल दिलाती है. पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव की कृपा बरसाने वाला प्रदोष व्रत रखा जाएगा. चूंकि यह प्रदोष व्रत आज रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा. हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव के संग सूर्य देव की उपासना के लिए अति उत्तम माना गया है. आइए जानते हैं कि रवि प्रदोष व्रत की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर साधक को क्या पुण्यफल प्राप्त होते हैं.

रवि प्रदोष व्रत की तारीख : 12 जुलाई 2026, रविवार
रवि प्रदोष व्रत की पूजा का मुहूर्त (प्रदोषकाल का समय): सायंकाल 07:22 से लेकर 09:24 बजे तक
रवि प्रदोष व्रत के उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार यदि पूजा के किन उपायों से शिव संग सूर्यदेव की कृपा बरसती है, आइए इसे विस्तार से जानते हैं.

पितृ दोष दूर करने के लिए करें ये उपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार रवि प्रदोष व्रत को पितृ दोष दूर करने के लिए उत्तम दिन माना गया है. ऐसे में आज किसी भी शिवालय में जाकर व्यक्ति को भगवान शिव को काला तिल मिश्रित दूध लेकर विशेष रूप से अर्पित करना चाहिए. भगवान शिव की पूजा का यह उपाय करने के बाद अपने पितरों का स्मरण करते हुए 'ॐ पितृभ्यो नमः' का कम से कम एक माला जप अवश्य करें.

सूर्यदेव की पूजा का जरूर करें ये उपाय
रवि प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान सूर्य देवता से सौभाग्य और आरोग्य का आशीर्वाद पाने के लिए साधक को प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद तांबे के लोटे में लाल पुष्प, अक्षत, रोली अथवा लाल चंदन डालकर जल अर्घ्य देना चाहिए. सूर्य को अर्घ्य देने के बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना बिल्कुल न भूलें.

शिव पूजा में करें ये महाउपाय
हिंदू मान्यता के अनुसार रवि प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा में उनकी प्रिय चीजें जैसे गंगाजल, बेलपत्र, शमी पत्र, आक का पुष्प अवश्य अर्पित् करें. इसके बाद भगवान शिव की महिमा का गान शिव चालीसा, रुद्राष्टकं, शिव महिम्न स्तोत्र आदि करते हुए महादेव से अपनी मनोकामना कहें. मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की उपासना से शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपने साधकों पर पूरी कृपा बरसाते हैं.

रवि प्रदोष व्रत की पूजा के लाभ
- हिंदू मान्यता के अनुसार रवि प्रदोष व्रत को करने पर साधक को भगवान शिव संग सूर्य देवता का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.
- मान्यता है कि रवि प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से साधक की सुख-समृद्धि और आयु बढ़ती है.
- भगवान सूर्य के आशीर्वाद से जहां साधक को सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है, वहीं देवों के देव महादेव उसके जीवन में आने वाली सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करते हुए उसे सभी सुख प्रदान करते हैं.
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में राशि के अनुसार करेंगे शक्ति साधना तो जल्द पूरी होगी मनोकामना
- रवि प्रदोष व्रत के पुण्यफल से साधक को मान-सम्मान और निरोगी काया प्राप्त होती है तो वहीं मृत्युंजय कहलाने वाले भगवान शिव उसे अकाल मृत्यु का भय दूर करते हुए उसका सभी प्रकार से कल्याण करते हैं.
- हिंदू मान्यता के अनुसार रवि प्रदोष व्रत को करने से साधक के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं