पितृपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का खास समय माना जाता है. इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे धार्मिक कार्य किए जाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कई बार पितर सपने में दिखाई दे सकते हैं. खासतौर पर अगर सपने में पूर्वज रोते हुए, परेशान या चुपचाप नजर आएं तो इसे लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, स्वप्न शास्त्र में ऐसे सपनों को किस तरह देखा जाता है और इस दौरान क्या उपाय किए जा सकते हैं, आइए जानते हैं.
2026 में कब से शुरू होगा पितृपक्ष?
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करते हैं.
सपने में पूर्वजों को रोते देखना
आचार्य मदन मोहन ने बताया कि स्वप्न शास्त्र की मान्यताओं में पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को रोते हुए देखना शुभ नहीं माना जाता है. इसे पूर्वजों की नाराजगी या किसी अधूरी इच्छा से जोड़कर देखा जाता है. ऐसी स्थिति में पूर्वजों के निमित्त किए जााने वाले धार्मिक कर्मों पर ध्यान देने की मान्यता है.
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चुपचाप दिखें पूर्वज तो क्या समझें
अगर सपने में पूर्वज बिना कुछ बोले शांत या उदास दिखाई दें, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे किसी बात की ओर ध्यान दिलाने वाला संकेत मानाा जाता है. हालांकि, ऐसे सपने आाने का कारण व्यक्ति की पुरानी यादें और भावनाएं भी हो सकती हैं.
सपना आए तो करें ये उपाय
ऐसा सपना आने पर घबराने के बजाय पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें. पितृपक्ष में परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करें. पूर्वजों के नाम से जरूरतमंदों को भोजन करानाा और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी धार्मिक रूप से शुभ मानाा जाता है.
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