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घर का मुख्य दरवाजा कहीं गलत दिशा में तो नहीं? जानिए क्या कहता है वास्तुशास्त्र

Home's main entrance gate direction : वास्तु शास्त्र के मुताबिक यही दरवाजा वह जगह है, जहां से घर में पॉजिटिव या नेगेटिव एनर्जी प्रवेश करती है. अगर यह सही दिशा में न हो, तो इसका असर घर की शांति, सेहत और आर्थिक स्थिति तक पर पड़ सकता है.

घर का मुख्य दरवाजा कहीं गलत दिशा में तो नहीं? जानिए क्या कहता है वास्तुशास्त्र
कहीं गलत द‍िशा में तो नहीं आपके घर का दरवाजा.

Vastu Tips: घर बनाते समय लोग डिजाइन, बजट और लोकेशन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन एक चीज जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह है मुख्य दरवाजे की दिशा. वास्तु शास्त्र के मुताबिक यही दरवाजा वह जगह है, जहां से घर में पॉजिटिव या नेगेटिव एनर्जी प्रवेश करती है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर मुख्य द्वार सही दिशा में न हो, तो इसका असर घर की शांति, सेहत और आर्थिक स्थिति तक पर पड़ सकता है. लेकिन अब खरीदार पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक हो गए हैं और घर की दिशा, रोशनी और वेंटिलेशन के साथ-साथ वास्तु पर भी ध्यान दे रहे हैं. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार घर के मुख्य दरवाजे किस दिशा में होना चाहिए.

उत्तर और पूर्व दिशा को क्यों माना जाता है बेहतर

वास्तु के मुताबिक, उत्तर और पूर्व दिशा में बना मुख्य दरवाजा ज्यादा अनुकूल माना जाता है. माना जाता है कि इन दिशाओं से आने वाली रोशनी और हवा घर के माहौल को संतुलित रखने में मदद करती है. इन दोनों दिशाओं के मध्य में भी एंट्रेंस रखा जा सकता है. खासकर उत्तर-पूर्व दिशा को लेकर यह मान्यता है कि यह पॉजिटिव एनर्जी के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल होती है, इसलिए इस दिशा में एंट्रेंस को प्राथमिकता दी जाती है. 

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दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में न रखें मेन गेट 

वास्तु के मुताबिक, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुख्य दरवाजा नहीं होना चाहिए. इसे बेड एंट्री तक कहा जा जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे घरों में रहना मुश्किल है, लेकिन इस तरह के एंट्रेंस के साथ कुछ अतिरिक्त सावधानियां रखने की जरूरत बताई जाती है. कई मामलों में लोग वास्तु से जुड़े उपाय अपनाकर बैलेंस बनाने की कोशिश भी करते हैं, ताकि किसी तरह का नेगेटिव असर कम किया जा सके.

हर घर के लिए एक जैसा नियम नहीं

केवल दिशा ही नहीं, बल्कि मुख्य दरवाजे के आसपास का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. दरवाजे के सामने साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी और खुलापन होना जरूरी माना जाता है. वहीं, टूटी-फूटी चीजें या कचरा एंट्रेंस के सामने होना नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. एक अहम बात यह भी है कि हर प्लॉट, हर शहर और हर घर की बनावट अलग होती है. ऐसे में एक ही नियम हर जगह लागू हो, यह जरूरी नहीं है. इसी वजह से एक्सपर्ट्स घर की पूरी प्लानिंग देखकर ही अंतिम सलाह देने की बात कहते हैं.

रियल एस्टेट मार्केट में भी अब खरीदार घर की दिशा और वास्तु को लेकर ज्यादा सजग हो गए हैं. कई लोग घर खरीदने से पहले मुख्य दरवाजे की दिशा जरूर चेक करते हैं. इसका असर प्रॉपर्टी की डिमांड पर भी देखने को मिल रहा है. यानी घर का मुख्य दरवाजा सिर्फ एक एंट्री पॉइंट नहीं, बल्कि पूरे घर के माहौल से जुड़ा अहम हिस्सा माना जाता है. ऐसे में इसकी दिशा को नजरअंदाज करने के बजाय समझदारी से फैसला लेना बेहतर हो सकता है.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्तर और पूर्व दिशा में मुख्य दरवाजा होना अनुकूल माना जाता है, खासकर उत्तर-पूर्व दिशा पॉजिटिव ऊर्जा के लिए बेहतर होती है।
इन दिशाओं में मुख्य दरवाजा नकारात्मक प्रभाव ला सकता है, इसलिए वास्तु में इसे टाला जाता है और सावधानियां अपनाने की सलाह दी जाती है।
दरवाजे के सामने साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी और खुलापन होना जरूरी है, टूटी-फूटी चीजें और कचरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
हर घर की बनावट अलग होती है, इसलिए वास्तु नियम भी घर की प्लानिंग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
खरीदार अब घर की दिशा और वास्तु पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जिससे प्रॉपर्टी की डिमांड और मूल्य प्रभावित होता है।

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