Gupt Navratri 2026 Maa Dhumavati Puja Vidhi: सनातन परंपरा में माघ और आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष में प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है. शक्ति की साधना से जुड़े ये 9 दिन 10 महाविद्या की पूजा, व्रत, जप-तप आदि के लिए अत्यंत ही शुभ और सिद्ध माने गये हैं. पंचांग के अनुसार आज गुप्त नवरात्रि की सप्तमी तिथि है जो कि देवी दुर्गा के धूमावती स्वरूप की साधना के लिए समर्पित है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां धूमावती की पूजा करने का क्या पुण्यफल है? मां धूमावती की पूजा कैसे करनी चाहिए, आइए इन सभी बातों को विस्तार से जानते हैं.
मां धूमावती की पूजा विधि
हिंदू मान्यता के अनुसार मां धूमावती को देवी पार्वती का एक अत्यंत उग्र स्वरूप माना जाता है. जीवन से जुड़े तमाम दुखों और कष्टों को दूर करने वाले मां धूमावती की पूजा के लिए साधक को स्नान-ध्यान करने के बाद पूजा स्थल में एक चौकी पर माता का चित्र या फिर मूर्ति रखकर सबसे उसे शुद्ध जल से पवित्र करना चाहिए. इसके बाद साधक को देवी को पुष्प, रोली, चंदन, धूप, दीप, फल व अन्य प्रकार के भोग लगाते हुए विधि-विधान से पूजा करना चाहिए.
हिंदू मान्यता के अनुसार नवरात्रि में जहां सभी देवियों को मीठा भोग लगाया जाता है, वहीं मां धूमावती को उड़द की दाल की खिचड़ी, काले तिल, आदि का नमकीन भोग लगता है. गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन की जाने वाली धूमावती की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए साधक को मां धूमावती के स्तोत्र का विशेष रूप से पाठ करना चाहिए.
मां धूमावती की पूजा के नियम
- साधक को मां धूमावती की पूजा सफेद वस्त्र पहनकर करना चाहिए.
- मां धूमावती की साधना हमेशा गुप्त रूप से एकांत स्थान पर करें.
- हिंदू मान्यता के अनुसार महिलाओं को मां धूमावती की पूजा करने की मनाही है, इसलिए उन्हें इस पूजा में न तो शामिल होना चाहिए और न ही देवी के दर्शन करने चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार मां धूमावती की पूजा में साधक को रुद्राक्ष की माला से 'ॐ धूं धूं धूमावत्यै फट्' अधिक से अधिक जप करना चाहिए.
- यदि कोई साधक मां धूमावती की पूजा में स्तोत्र या मंत्र को न पढ़ पाए तो उसे माता की कथा का पाठ करने के बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ आरती करनी चाहिए.
मां धूमावती की कथा
हिंदू मान्यता के अनुसार एक बार माता पार्वती को बहुत जोर से भूख लगी और उन्होंने महादेव कुछ खाने को मांगा, लेकिन भगवान शिव ने उन्हें थोड़ा इंतजार करने को कहा. मान्यता है माता पार्वती की जब भूख बर्दाश्त से ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने महादेव को ही निगल लिया. मान्यता है कि महादेव के गले में विष होने के कारण देवी उसे बर्दाश्त नहीं कर पाई और उनका स्वरूप भयंकर दिखने लगा.
उनका शरीर जर्जर होने लगा और उनके मुख से जब धुंआ निकलना प्रारंभ हुआ तो उन्होंने महादेव से बाहर आने की प्रार्थना की. जब शिव बाहर आए तो उन्होंने मां पार्वती को श्राप दिया किया तुमने अपनी भूख को शांत करने के लिए अपने पति को ही निगल लिया, इसलिए तुम्हारा यह स्वरूप विधवा के रूप में ही जाना जाएगा. माता के इसी स्वरूप के कारण सुहागिन महिलाएं उनकी साधना नहीं करती हैं.
मां धूमावती की पूजा के लाभ
हिंदू मान्यता के अनुसार मां धूमावती की विधि-विधान से पूजा करने वाले साधक पर जब मां धूमावती की कृपा बरसती है तो उसके जीवन से जुड़े सारे रोग-शोक शीघ्र ही दूर हो जाते हैं. मां धूमावती की पूजा के पुण्यफल से उसे जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है और वह हमेशा निरोगी रहते हुए सभी सुखों को प्राप्त करता है. हिंदू मान्यता के अनुसार मां धूमावती साधक के दुख-दारिद्रय को दूर करते हुए सभी प्रकार के भय से मुक्त करती हैं. मां धूमावती की साधना साधक को जीवन के तमाम तरह के संकटों का मुकाबला करने की शक्ति प्रदान करती हैं.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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