दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है. हर साल यह पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस साल दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी. इस दिन लोग घरों को सजाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. इसके साथ ही दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा की जाती है. माता लक्ष्मी धन, समृद्धि और सुख-वैभव की देवी मानी जाती हैं, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? चलिए आपको बताते हैं दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की एक साथ पूजा क्यों की जाती है.
मां लक्ष्मी का दिवाली से क्या संबंध है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. उन्हें धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है. मान्यता है कि दीपावली की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशित तथा श्रद्धा से भरे घरों में निवास करती हैं. इसलिए लोग इस दिन लक्ष्मी पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
गणेश की पूजा क्यों की जाती है?
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता, विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है. दीपावली पर गणेश जी की पूजा ये संदेश देती है कि जीवन में केवल धन होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करने के लिए बुद्धि और विवेक का होना भी जरूरी है.
लक्ष्मी और गणेश की पूजा एक साथ क्यों होती है?
यूट्यूब पर @Bharatmataonline नाम के चैनल पर एक वीडियो शेयर किया गया. इस वीडियो में बताया गया कि लक्ष्मी और गणेश की पूजा एक साथ क्यों होती है. वीडियो में मां लक्ष्मी जीवन में समृद्धि और सुख का प्रतीक हैं, जबकि गणेश जी ज्ञान, समझदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं. धन के साथ बुद्धि न हो, तो समृद्धि भी समस्याओं का कारण बन सकती है. इसलिए दीपावली पर दोनों की पूजा कर लोग जीवन में धन और विवेक, दोनों का आशीर्वाद मांगते हैं.
मां लक्ष्मी और गणेशजी से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मां लक्ष्मी को अपने धन और वैभव पर अभिमान हो गया था. तब भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि भले ही संसार में हर कोई उनकी कृपा पाना चाहता है, लेकिन मातृत्व के बिना उनका जीवन अधूरा है. भगवान विष्णु की ये बात सुनकर मां लक्ष्मी उदास हो गईं. मां लक्ष्मी को दुखी देखकर माता पार्वती ने अपने पुत्र भगवान गणेश को उनकी गोद में बैठा दिया. इससे लक्ष्मी जी बेहद प्रसन्न हुईं और उन्होंने गणेशजी को अपना पुत्र स्वीकार कर लिया. कहा जाता है कि इसके बाद मां लक्ष्मी ने वरदान दिया कि जो भी भक्त उनकी पूजा करेगा, उसे भगवान गणेश की आराधना भी जरूर करनी होगी. ऐसा करने से ही भक्त को दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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