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This Article is From Aug 03, 2017

जानिए कैसा होना चाहिए वास्तु के अनुसार घर की दीवारों और पर्दों के रंग

भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार इन वास्तुदोषों को दूर या कम करने के लिए घर की आंतरिक सज्जा विशेष मददगार होती हैं. निस्संदेह घर के इंटीरियर डेकोरेशन में दीवारों के रंग और पर्दों की महत्वपूर्ण भूमिका है.

जानिए कैसा होना चाहिए वास्तु के अनुसार घर की दीवारों और पर्दों के रंग
हर व्यक्ति अपने घर को खूबसूरत बनाना चाहता है और सुख-शांति से रहना चाहता है. लेकिन शहरों की बढ़ती आबादी और रहने लायक जमीन की कमी के कारण वास्तुशास्त्र के अनुसार मनचाही भूमिखंड मिलना मुश्किल-सा हो गया है. ऐसे में लोगों को शहरी विकास प्राधिकरणों या निजी बिल्डरों द्वारा दिए जा रहे प्लॉट या फ्लैट लेना उनकी मजबूरी होती है. लेकिन प्राय: ये प्लॉट या फ्लैट पूरी तरह से वास्तु के अनुसार नहीं होते हैं. ऐसे प्लॉटों या फ्लैटों में कई प्रकार के वास्तुदोष होते हैं जिससे जीवन में कई तरह की परेशानियां आती रहती हैं.

- भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार इन वास्तुदोषों को दूर या कम करने के लिए घर की आंतरिक सज्जा विशेष मददगार होती हैं. निस्संदेह घर के इंटीरियर डेकोरेशन में दीवारों के रंग और पर्दों की महत्वपूर्ण भूमिका है.

- इसलिए घर की दीवारों और पर्दों के रंग का सही चुनाव करना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि में वृद्धि हो. अलग-अलग रंग के पर्दे घर को न केवल खूबसूरत बनाते हैं, बल्कि घर में पॉजिटिव एनर्जी बनाए रखने में सहायक होते हैं.

- चूंकि घर के हर कमरे का उद्देश्य अलग-अलग होता है. भारतीय वास्तुशास्त्र घर के सभी कमरों की पुताई एक ही रंग से नहीं करवानी चाहिए.

- मानसिक शांति और रिश्तों में मधुरता के लिए रंग का वैज्ञानिक महत्व है. बेडरुम को गुलाबी, आसमानी या हल्के हरे रंग से पुताई करवाने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है.

- किचन के लिए लाल और नारंगी शुभ रंग माना जाता है. टॉयलेट और बाथरुम के लिए सफेद या हल्का नीला रंग अनुकूल होता है.

- घर में पर्दा लगाना हो यह ध्यान रखें कि पर्दे हमेशा दो रंग की परतों वाली होनी चाहिए. यदि बेडरुम पूर्व दिशा में हो तो हरे रंग के पर्दे अच्छे होते हैं.

- उत्तर दिशा के कमरे लिए नीले पर्दे और पश्चिम दिशा के कमरे के लिए सफेद रंग के पर्दे लगाना उचित माना गया है. यदि कमरा दक्षिण दिशा के कोने पर हो तो लाल रंग के पर्दे उपयुक्त माने गए हैं.

- ड्राइंग रूम यानी बैठक घर का काफी महत्वपूर्ण कमरा होता है. इस कमरे की दीवारों को हल्के नीले या आसमानी, क्रीम कलर, पीला या हल्के हरे रंग का होना उत्तम माना गया है. इस कमरे लिए क्रीम, सफेद, सुनहरे या भूरे रंग का पर्दों प्रयोग किया जा सकता है.

- वायव्य दिशा में बने ड्राइंग रूम में हल्का हरा, हलका स्लेटी, सफेद या क्रीम रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए. यदि ड्राइंग रूम की खिड़कियां-दरवाजे में उत्तर दिशा में हों तो हरे आधार पर नीले रंग से बनी जल की लहरों जैसी डिजाइन के पर्दे उत्तम होते हैं.

- भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की सीलिंग ब्रह्मस्थान की भूमिका निभाती है और इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है. यदि आप अपने घर की सीलिंग को गुलाबी, पीले, नीले आदि रंगों से पुतवाना चाहते हैं तो रुकिए क्योंकि छतों का रंग सफेद ही सर्वोत्तम माना गया है.

- यदि घर में पूजा घर बनवाया है तो इस दीवारों को हल्का नीला रंग से रंगवाना चाहिए क्योंकि यह विराटता, शांति और एकाग्रता का प्रतीक है.

- शयन कक्ष में पूजागृह नहीं होना चाहिए, लेकिन शयनकक्ष में पूजा-स्थान बनाना मजबूरी हो तो वहां पर्दे की व्यवस्था बहुत जरूरी है. इसके लिए सफेद, हल्के पीला, हल्के गुलाबी या सुनहरे रंग के पर्दे शुभ माने गए हैं.
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