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April Pradosh Vrat 2026: अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

April Pradosh Vrat 2026: अगर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना चाहती हैं, तो अप्रैल 2026 के इन दोनों प्रदोष व्रतों को श्रद्धा और नियम के साथ जरूर करें. सही समय पर पूजा करने से आपको इसका पूरा फल मिलेगा.

April Pradosh Vrat 2026: अप्रैल में कब-कब है प्रदोष व्रत? जानिए तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व
अप्रैल में 2 बड़े प्रदोष व्रत! सही समय पर पूजा की तो बदल सकती है किस्मत

April Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, और प्रदोष व्रत उन्हीं को समर्पित एक खास व्रत है. यह व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है और माना जाता है कि प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

अप्रैल 2026 का महीना इसलिए भी खास है क्योंकि इस दौरान दो प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं, जो भक्तों के लिए एक बड़ा आध्यात्मिक अवसर लेकर आते हैं. सही विधि और शुभ मुहूर्त में पूजा करने से इस व्रत का कई गुना फल मिलता है. ऐसे में अगर आप भी इस व्रत को रखने की सोच रही हैं, तो आइए जानते हैं अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की सही तिथियां, पूजा का शुभ समय और इसकी पूरी विधि.

अप्रैल 2026 में प्रदोष व्रत की तिथियां:
- पहला प्रदोष व्रत: 15 अप्रैल 2026 (बुध प्रदोष)
- दूसरा प्रदोष व्रत: 28 अप्रैल 2026 (भौम प्रदोष)

पहला प्रदोष व्रत: बुध प्रदोष (15 अप्रैल)

जब प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ता है, तो इसे बुध प्रदोष कहा जाता है.

यह व्रत विशेष रूप से:
- बुद्धि और समझ बढ़ाने,
- संवाद कौशल सुधारने,
- पारिवारिक सुख पाने के लिए किया जाता है.

पूजा का शुभ मुहूर्त:
- शाम 6:56 बजे से रात 9:13 बजे तक

पूजा विधि:
- सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें
- दिनभर व्रत रखें और शिव जी का ध्यान करें
- शाम को प्रदोष काल में पूजा करें
- जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करें
- ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें

दूसरा प्रदोष व्रत: भौम प्रदोष (28 अप्रैल)

जब प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है.

यह व्रत खासतौर पर:
- स्वास्थ्य सुधारने,
- साहस बढ़ाने,
- कर्ज से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है.

पूजा का शुभ मुहूर्त:
- शाम 7:01 बजे से रात 9:07 बजे तक

पूजा विधि:
- स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- फलाहार या सात्विक भोजन करें
- प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करें
- जल, दूध, शहद और गंगाजल अर्पित करें
- लाल फूल, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाएं

प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत को सभी व्रतों में बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. मानसिक शांति और आत्मिक बल मिलता है. भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. जो लोग नियमित रूप से यह व्रत करते हैं, उनके जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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