- क्यूबा गंभीर ऊर्जा संकट से गुजर रहा है और हालात लगातार बिगड़ रहे हैं.
- ट्रंप ने पहली बार नरमी दिखाते हुए रूसी टैंकर को क्यूबा जाने से नहीं रोका.
- टैंकर को रोकने से अमेरिका और रूस के बीच तनाव और बढ़ता. शायद इसीलिए ट्रंप ने नरम बरती.
रूस ने सोमवार को बताया कि भले ही अमेरिका ने क्यूबा की नाकेबंदी कर रखी है पर उसके (रूस के) तेल की एक खेप इस द्वीप पर पहुंच गई है. इसी महीने की शुरुआत में रूस ने अनातोली कोलोदकिन नाम के एक तेल टैंकर को क्यूबा भेजा था. इस टैंकर पर प्रतिबंध लगे हुए थे, जबकि उसमें 7 लाख 73 हजार बैरल कच्चा तेल लदा था. अनातोली कोलोदकिन ऐसे वक्त में वामपंथी शासन वाले क्यूबा में पहुंचा है जब इसी महीने तीन ऐसे बड़े ब्लैकआउट हुए हैं कि पूरा देश अंधेरे में डूबा रहा. कई महीने से क्यूबा ईंधन की भारी कमी से जूझ रहा है.
दिमित्री ने कहा- और भी तेल भेजेगा रूस
रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि रूस ने अपने क्यूबाई दोस्तों को जरूरी मदद पहुंचाने को अपना दायित्व समझते हुए ऐसा किया है. उन्होंने कहा, "हमें खुशी है कि पेट्रोलियम उत्पादों की यह खेप वहां पहुंच चुकी है. तेल की यह खेप वहां जनवरी के बाद पहुंचने वाली पहली खेप है. जनवरी के महीने में ही अमेरिकी सेना ने क्यूबा के सहयोगी रहे वेनेजुएला के राष्ट्रपति को काराकास से अगवा कर लिया था.
मादुरो को सत्ता से हटाए जाने की वजह से क्यूबा में तेल की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई, जिससे इस द्वीपीय देश पर ऊर्जा का संकट पैदा हो गया. इससे यहां ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगीं और रोज बिजली गुल होने की समस्या शुरू हुई जो बाद में इस महीने पूरे देश में बड़े ब्लैकआउट में तब्दील हो गई.
इसके साथ ही दिमित्री पेस्कोव ने यह भी कहा कि रूस यहां ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रखेगा. पेस्कोव बोले, "हम काम जारी रखेंगे. क्यूबा के लोग इस समय जिस मुश्किल हालात का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए हम इस मुद्दे पर काम करते रहेंगे."
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क्यूबा में ऐसी स्थिति हुई क्यों?
दरअसल 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जनवरी को एक ऐसे आदेश पर हस्ताक्षर किया, जिसमें लिखा था कि जो भी देश क्यूबा को तेल आपूर्ति करते हैं उन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा.
अब ये बताया गया है कि लगातार खराब होती क्यूबा की स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने मानवीय आधार पर रूस और अन्य देशों को क्यूबा को बीच-बीच में तेल की खेप भेजने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है.
रूस की समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के मुताबिक क्यूबा पर अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कोस्ट गार्ड की दो गश्ती नौकाओं ने रूसी टैंकरों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की. सोशल मीडिया पर चल रही कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया कि रूस के प्रतिबंधित तेल के जहाज अनातोली कोलोदकिन को सरकारी फैसले के अनुसार इंग्लिश चैनल और अटलांटिक से गुजरने के दौरान एक नौसैनिक युद्धपोत और एक पनडुब्बी के जरिए एस्कॉर्ट किया गया था.
इस दौरान रूस ने अपने सामानों को ले जाने वाले टैंकर जहाजों की निगरानी बढ़ा दी है. मैरीटाइम बोर्ड ने बताया कि रूसी झंडे वाले जहाजों के लिए मोबाइल फायर सपोर्ट यूनिट से एस्कॉर्ट की मांग की गई है, इससे समुद्री सुरक्षा और मजबूत हुई है.
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ट्रंप ने रूस के क्यूबा को तेल भेजने पर क्या कहा था?
रूस के तेल टैंकर अनातोली कोलोदकिन के क्यूबा पहुंचने से ठीक एक दिन पहले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयरफोर्स वन में चढ़ते वक्त पत्रकारों के इसी सवाल पर जवाब दिया था.
पत्रकारों ने ट्रंप से जब ये पूछा कि ऐसी खबरें हैं कि अमेरिका एक रूसी तेल टैंकर को क्यूबा जाने देगा?
इस पर ट्रंप ने कहा, "अगर कोई देश क्यूबा में कुछ तेल भेजना चाहता है, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है."
फिर उनसे ये पूछा गया कि क्या इससे पुतिन को मदद नहीं मिलेगी?
इस पर ट्रंप बोले, "नहीं. इससे उन्हें कोई मदद नहीं मिलेगी. इससे बस उनका एक टैंकर कम हो जाएगा. बस इतनी सी बात है. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता."

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क्यूबा के हालात पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी
पिछले हफ्ते ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी थी कि ईंधन की भारी कमी की वजह से क्यूबा को अस्पतालों में इमरजेंसी और आईसीयू सेवाएं जारी रखने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, क्यूबा में हालात बदतर हैं तो इसके पीछे वजह उसे तेल की आपूर्ति करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी देना है.
स्थिति ये है कि देशभर में बार-बार बिजली की कटौती हो रही है. पेट्रोल भारी किल्लत है. ट्रांसपोर्ट सिस्टम करीब-करीब बैठ चुका है. यहां तक कि वहां अस्पतालों में जरूरी सेवाओं पर भी गंभीर असर पड़ा है. ऐसे में आम लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है. कई जगहों पर लोग घंटों लाइन में खड़े होकर ईंधन का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि एक बड़ा मानवीय संकट बन गया है.
अब जबकि ट्रंप ने यह बयान दिया है कि तेल के टैंकर से क्यूबा की सरकार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा तो यह इस ओर ईशारा करता है कि अमेरिकी इस स्थिति को सीमित प्रभाव वाली घटना के तौर पर देख रहा है.
माना जा रहा है कि मानवीय संकट को देखते हुए ही ट्रंप ने ये निर्णय लिया है. अगर वो रूस के तेल टैंकर को रोकने की कोशिश करता तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते थे.
पहला तो यह कि जिन वजहों से अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं, अब सैद्धांतिक रूप से वो मान्य ही नहीं रहे क्योंकि खुद अमेरिका ईरान पर हमले कर चुका है.
ऐसे में अगर वो रूस के टैंकर को रोकता तो इसे सीधा टकराव माना जाता और नौसैनिक टकराव या तनाव पैदा हो सकता था.
पूरी दुनिया पहले ही कई संघर्षों से गुजर रही है. अगर रूसी टैंकरों को रोकने पर किसी भी तरह का तनाव पैदा होता तो स्थिति और भी जटिल हो जाती जिसका वैश्विक स्तर पर प्रभाव पड़ना तय था.
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रूस को क्या फायदा?
देखने में यह एक तेल टैंकर की सप्लाई भर लग सकती है पर जहां रूस ने क्यूबा को तेल मुहैया करा कर यह संदेश दिया है कि वो अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है. वहीं अमेरिका को बगैर किसी टकराव के चेतावनी भी दे डाली है. इस तेल टैंकर के जरिए रूस ने वैश्विक स्तर पर अपनी सक्रियता और प्रभाव का प्रदर्शन भी किया है. साथ ही अमेरिका के दुश्मन देशों में गिने जाने वाले और रणनीतिक रूप से अहमियत रखने वाले क्यूबा में तेल भेज कर उसने अपने शक्ति का प्रदर्शन भी किया है.
जहां यह क्यूबा के लिए तात्कालिक राहत वाले तेल टैंकर हैं जिससे उसे बिजली संकट में कुछ राहत मिल सकती है. वहीं रूस अपनी ग्लोबल इमेज मजबूत बना रहा है. कुल मिलाकर अमेरिका ने इस टैंकर को नहीं रोका तो उसके पीछे ये एक बड़ी वजह होगी कि वो जानता है कि इससे शक्ति संतुलन नहीं बदलेगा, लिहाजा उसने नरम रवैया अपनाया.
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