
नरेंद्र मोदी की वाराणसी में रैली को लेकर हुए विवाद के बाद दिल्ली और वाराणसी में चुनाव आयोग के खिलाफ बीजेपी का प्रदर्शन खत्म हो गया है।
वाराणसी में अरुण जेटली, अमित शाह, अनंत कुमार और लक्ष्मीकांत वाजपेयी की अगुवाई में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) के लंका गेट पर धरना दिया। इस धरने में बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं। वहीं दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने रविशंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी सहित बीजेपी के कई नेताओं ने धरना दिया।
वाराणसी में धरने पर बैठे बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने एनडीटीवी इंडिया से कहा कि सुरक्षा के नाम पर नरेंद्र मोदी की रैली को इजाजत नहीं दिया जाना गलत है और चुनाव अधिकारी की इस गलती को दुरुस्त न करके चुनाव आयोग ने भी कमजोरी का परिचय दिया है।
नरेंद्र मोदी रोहनिया में रैली करने के बाद शाम साढ़े चार बजे बीएचयू हेलीपैड पर उतरेंगे और उसके बाद रवींद्र पुरी, लंका बाइपास, शिवाला, सोनारपुरा, मदनपुरा, गुदौलिया, गिरिजाघर, लाक्षा, गुरुबाग, रथयात्रा चौराहा होते हुए केंद्रीय कार्यालय पहुंचेंगे।
इससे पूर्व, नरेंद्र मोदी ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया, "आज आरती न कर पाने के लिए मां गंगा से माफी मांगता हूं। उम्मीद है ये लोग समझ पाएं कि एक मां का प्यार राजनीति से ऊपर है..."
मोदी ने ट्वीट में कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुनाव आयोग संस्थान की निष्पक्षता को लेकर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि हमारे कार्यकर्ताओं को सत्याग्रह करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, मैं अपने कार्यकर्ता भाई−बहनों से अपील करता हूं कि वे शांति बनाएं रखें और ये सुनिश्चित करें कि आम लोगों को कोई परेशानी न हो।"
इस विवाद के बाद वाराणसी के डीएम प्रांजल यादव ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के पांच कार्यक्रमों में से चार को जल्द से जल्द इजाजत दी गई, जबकि बेनियाबाग इलाके में रैली को सुरक्षा कारणों से नहीं करने दिया गया। प्रशासन का कहना है कि लोकल इंटेलिजेंस से मिली रिपोर्ट के अनुसार इस इलाके में रैली की इजाजत नहीं दी गई।
डीएम की सफाई के बाद बीजेपी नेता अमित शाह ने कहा कि पार्टी ने अपने सारे कार्यक्रम वापस ले लिए हैं और अब वह सत्याग्रह के मार्ग पर ही आगे बढ़ेगी।
उधर, चुनाव आयोग के खिलाफ बीजेपी के विरोध प्रदर्शन के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने अरुण जेटली को उनके चिट्ठी का जवाब दिया है। चुनाव आयोग ने लिखा है कि वह बीजेपी के फैसले से हैरान और निराश है। आयोग का कहना है कि रैली की इजाजत जिलाधिकारी या फिर स्थानीय आधिकारी देते हैं, चुनाव आयोग नहीं।
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