फाइल फोटो
लालकृष्ण आडवाणी द्वारा गांधीनगर की बजाय भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने से भाजपा में मचे हडकंप को अंतत: खुद ही विराम देते हुए पार्टी के इस वरिष्ठ नेता ने गुरुवार को अपने दल के इस निर्णय को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्हें गुजरात की उसी सीट से प्रत्याशी बनाया गया है, जिसका वह 1991 से प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के इस बयान के बाद कि यह तय करना आडवाणी का काम है कि भोपाल या गांधीनगर में से वह किसी चुनते हैं, पार्टी के इस 86 वर्षीय नेता ने लगभग 24 घंटे चले उस नाटक का पटाक्षेप किया जिसने उनके और मोदी के बीच चल रहे तनाव को फिर सरेआम कर दिया है।
भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताने के बाद भी गांधीनगर से उम्मीदवार बनाए जाने के पार्टी के कल के फैसले के बाद से आडवाणी सख्त नाराज थे।
पार्टी के निर्णय को अंतत: आज देर शाम स्वीकार करते हुए आडवाणी ने जारी एक बयान में कहा, आज सुबह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी मेरे निवास पर आए और इस बात पर जोर दिया कि गुजरात की जनता की इच्छा है कि एक बार फिर मैं गांधीनगर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करूं।
उन्होंने कहा, 'मैं 1991 से लोकसभा में गांधीनगर चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता आया हूं, मैंने निर्णय किया है कि 2014 का आम चुनाव मैं गांधीनगर से ही लड़ूंगा। मैंने अपने इस निर्णय से पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को अवगत करा दिया है।'
कल रात केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा पार्टी उम्मीदवारों की छठी सूची जारी करने बाद से इस तूल पकड़ने वाले मामले को शांत करने के लिए आज शाम तक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में खूब गहमा गहमी रही। मोदी के बाद सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और नायडु आदि उन्हें मनाने बारी बारी से उनके निवास पर गए।
चेन्नई में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की ओर से बीच बचाव के रास्ता का उस समय आभास दिया गया जब उन्होंने कहा, 'यह आडवाणी जी को चुनना है कि उन्हें कहां से चुनाव लड़ना है।'
सिंह ने कहा कि कल केन्द्रीय चुनाव समिति द्वारा आडवाणी को गांधीनगर से उम्मीदवार बनाने का गुजरात की पार्टी इकाई का प्रस्ताव स्वीकार कर लिए जाने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश इकाई से एक प्रस्ताव मिला, जिसमें आडवाणी को भोपाल से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया गया है।
कल रात मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से भी भेंट की। समझा जाता है कि उन्होंने उनसे मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया।
भोपाल सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव करने के लिए आडवाणी ने अभी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे कैलाश जोशी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने पार्टी निर्णय को स्वीकार करते हुए अपने बयान में कहा, आज राजनाथ सिंह ने उन्हें सूचित किया कि संसदीय बोर्ड और केन्द्रीय चुनाव समिति के सभी सदस्यों से विचार विमर्श के बाद यह सहमति बनी कि भोपाल और गांधीनगर में से 'किसी एक सीट को चुनने का अधिकार मुझपर छोड़ दिया जाए। ..पार्टी सहयोगियों का यह भाव मुझे गहरे छू गया है।'
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