
निवर्तमान यूपीए सरकार की ओर से कर्नाटक के एचआर भारद्वाज और पंजाब के शिवराज पाटिल के साथ ही 10 से ज्यादा राज्यपालों की किस्मत दांव पर लगी हुई है, क्योंकि ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि नई व्यवस्था में उनसे शालीनता से राजभवन खाली करने करने को कहा जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक सोमवार को कार्यभार संभाल रही नरेंद्र मोदी सरकार बड़े पैमाने पर राज्यपालों को शायद ही हटाएगी, लेकिन इस तरह की पूरी संभावना है कि उनमें से कुछ को शालीनता से अपना इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है, जिससे कि नई नियुक्तियों का रास्ता साफ हो।
एक अधिकारी ने कहा कि यह सामान्य चीज है कि नई सरकार राजभवन में जमे कुछ राज्यपालों से इस्तीफा देने को कहे, क्योंकि हो सकता है कि शायद उनके खाके में वे फिट नहीं होते हों।
राज्यपालों में भारद्वाज (कर्नाटक), जगन्नाथ पहाड़िया (हरियाणा), देवानंद कुंवर (त्रिपुरा) और मारग्रेट अल्वा (राजस्थान) के पांच साल का कार्यकाल अगले तीन-चार महीने में पूरा होगा। भारद्वाज का कर्नाटक में पूर्व की भाजपा सरकार के साथ खिंचाव भरा संबंध रहा, वहीं अल्वा का राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ अच्छा संबंध बताया जाता है।
अगले छह से आठ महीने में जिनका कार्यकाल पूरा होगा, उनमें - कमला बेनीवाल (गुजरात), एमके नारायणन (पश्चिम बंगाल), जेबी पटनायक (असम), शिवराज पाटिल (पंजाब) और उर्मिला सिंह (हिमाचल प्रदेश) का नाम है। राज्य में लोकायुक्त नियुक्ति के मुद्दे पर गुजरात में मोदी सरकार के साथ बेनीवाल का विवाद किसी से छिपा हुआ नहीं है।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की नियुक्ति इस साल मार्च में केरल के राज्यपाल के तौर पर हुई। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा को अप्रैल 2013 में दूसरा कार्यकाल दिया गया। पूर्व गृह सचिव वीके दुग्गल को दिसंबर, 2013 में मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।
नई एनडीए सरकार की समीक्षा के दायरे में अन्य जो राज्यपाल आ सकते हैं, उनमें बीएल जोशी (उत्तरप्रदेश में अपना दूसरा कार्यकाल संभाल रहे हैं), बीवी वांचू (गोवा), के शंकरनारायणन (महाराष्ट्र में अपना दूसरा कार्यकाल संभाल रहे हैं), के रोसैया (तमिलनाडु), रामनरेश यादव (मध्य प्रदेश), डीवाई पाटिल (बिहार), श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल (सिक्किम), अजीज कुरैशी (उत्तराखंड), वकोम पुरुषोत्तम (मिजोरम) और सैयद अहमद (झारखंड) का नाम है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त, अरुणाचल प्रदेश के लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाशप्राप्त) निर्भय शर्मा, नगालैंड के अश्विनी कुमार और मेघालय के केके पॉल भी नई सरकार की समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं।
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