
राहुल गांधी द्वारा नरेंद्र मोदी की तुलना हिटलर से किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए भाजपा ने बुधवार को कहा कि आजाद भारत में अगर किसी ने हिटलर से प्रेरणा ली है तो वह कांग्रेस उपाध्यक्ष की दादी इंदिरा गांधी हैं, जिन्होंने देश में आपातकाल लगाया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा, 'आपातकाल में इंदिरा जी का हर कदम हिटलर के शासन से प्रेरित था। दोनों में बस एक मूल भेद है। हिटलर ने वंशवाद को बढ़ावा नहीं दिया क्योंकि उसके पास ऐसा करने के लिए कोई था ही नहीं।'
उन्होंने कहा, गुजरात में राहुल गांधी के भाषण को उन्होंने सुना जिसमें उन्होंने मोदी की तुलना हिटलर से की है। उन्होंने कहा 1975 में जब आपातकाल लगा तो राहुल एकदम युवा रहे होंगे। लेकिन उन 19 महीनों में क्या कुछ हुआ उससे वह अनिभज्ञ भी नहीं होंगे।
भाजपा नेता ने कहा, 'हिटलर और इंदिरा गांधी के बीच समानता चौंकाने वाली है।' जेटली ने कहा कि हिटलर ने 1933 में सत्ता में आने पर यह कह कर जर्मनी में आपातकाल लगाया कि कम्युनिस्ट सरकारी इमारतों को आग लगा रहे हैं जो बाद की जांच से गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने भी 26 जून 1975 को यह कह कर देश में आपातकाल लगाया कि जेपी आंदोलन में सशस्त्र बलों से कहा जा रहा है कि वे सरकार के अवैध आदेशों का पालन नहीं करें।
उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने 20 सूत्री आर्थिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए दावा किया कि देश में अनुशासन और विकास को गति देने के लिए आपातकाल लगाया गया है। भाजपा नेता ने कहा कि हिटलर ने भी 25 सूत्री आर्थिक कार्यक्रम की घोषणा की थी।
जेटली ने कहा कि हिटलर को जर्मनी की संसद में दो तिहाई बहुमत नहीं था। ऐसे में विपक्ष की शक्ति कम करने के लिए उसने विपक्ष के 91 सांसदों को गिरफ्तार करवा लिया और संविधान में संशोधन करके पूर्ण शक्ति हथिया ली। उन्होंने कहा, इंदिरा गांधी ने भी बड़ी संख्या में विपक्ष के सांसदों को गिरफ्तार कर लिया और संविधान में 42 वां काला संशोधन लायीं। यही नहीं उन्होंने एक कदम आगे जाते हुए संसद की कार्यवाही के प्रकाशन पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
भाजपा नेता ने कहा कि हिटलर और इंदिरा गांधी दोनों ने ही अपने अपने यहां आपातकाल लगा कर प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी और जीवन तथा स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों को भी निलंबित कर दिया।
उन्होंने कहा इंदिरा गांधी के अटार्नी जनरल ने उच्चतम न्यायालय में तर्क दिया कि जीवन तथा स्वतंत्रता के अधिकार के अभाव में एक कैदी की जेल में हत्या की जा सकती है। ‘‘और उस समय के दब्बू उच्चतम न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया।’’
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