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MP के दो IAS अधिकारियों के खिलाफ क्यों जारी हुआ गिरफ्तारी का वारंट? ये है पूरा मामला

IAS Officers Arrest Warrant: दोनों आईएएस अधिकारियों पर कोर्ट की अवमानना का आरोप है, कई बार नोटिस जारी होने के बावजूद उनकी तरफ से कोई भी कोर्ट नहीं पहुंचा था, जिसके बाद अब अरेस्ट वारंट जारी किया गया है.

MP के दो IAS अधिकारियों के खिलाफ क्यों जारी हुआ गिरफ्तारी का वारंट? ये है पूरा मामला
दो IAS अधिकारियों के खिलाफ जारी हुआ अरेस्ट वारंट

मध्य प्रदेश में दो सीनियर IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हुआ है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की तरफ से इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ ये वारंट जारी किया गया और उन्हें कोर्ट में मौजूद होने का आदेश दिया गया. दोनों अधिकारियों पर कोर्ट की अवमानना का आरोप है, जिसे लेकर उन्हें नोटिस भी दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद दोनों कोर्ट में पेश नहीं हुए. अब हाईकोर्ट की तरफ से दोनों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है. ऐसे में आज हम जानेंगे कि ये दोनों आईएएस अधिकारी कौन हैं और ये पूरा मामला क्या है. 

कौन हैं दोनों IAS अधिकारी?

मध्य प्रदेश के जिन दो आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ है, उनके नाम विवेक कुमार पोरवाल और संदीप जीआर हैं. विवेक कुमार पोरवाल 2000 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला. पिछले कुछ सालों में उन्होंने प्रदेश के कई अहम पदों पर काम किया. उनकी पढ़ाई की बात करें तो विवेक कुमार ने B.Sc.(Mathematics) और फिर एमटेक किया था. इसके बाद वो सिविल सेवा में आ गए. 

दूसरे आईएएस अधिकारी संदीप जीआर भी मध्य प्रदेश कैडर के 2013 बैच के अधिकारी हैं. पिछले 13 साल की नौकरी में उनकी चार अहम जिलों में पोस्टिंग हुई है और अहम पदों पर तैनाती हुई. संदीप जीआर ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. साथ ही उन्होंने M.A.(Public Admn) भी किया. वो मूल रूप से कर्नाटक से आते हैं. 

क्यों जारी हुआ अरेस्ट वारंट?

दरअसल अक्टूबर 2016 में मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से डेली वेज वर्कर्स को परमानेंट करने की एक योजना लाई गई थी. इसी योजना का हवाला देते हुए सागर जिले के कलेक्टर ऑफिस में काम करने वालीं एक महिला ने 2023 में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की. इसमें उन्होंने मांग की थी कि उन्हें परमानेंट किया जाए और उनकी सैलरी भी बढ़ाई जाए. इस मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता जिले के कलेक्टर को एक अर्जी सौंपे और कलेक्टर 90 दिन के अंदर इस पर फैसला दे. हाईकोर्ट ने कलेक्टर को जांच के बाद अपना फैसला देने के लिए कहा था. 

इस मामले में जब 90 दिन पूरे हो गए और कोई फैसला नहीं लिया गया तो याचिकाकर्ता महिला ने फिर से 2025 में दो IAS अधिकारियों का नाम लेते हुए कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की याचिका दायर कर दी. इनमें सागर के कलेक्टर संदीप जीआर और रेवेन्यू डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेट्री विवेक कुमार पोरवाल का नाम शामिल था. दोनों अधिकारियों को इस याचिका को लेकर नोटिस दिया गया, इसके बाद भी कोई एक्शन नहीं लिया गया और हाईकोर्ट को बताया गया कि सागर सिटी के तहसीलदार को इस कंटेंप्ट पिटीशन का ध्यान रखने लिए नियुक्त किया गया है. 

कोई वकील नहीं हुआ पेश

हालांकि किसी भी सुनवाई के दौरान दोनों ही अधिकारियों की तरफ से कोई भी ना तो कोई वकील पेश हुआ और ना ही वो खुद मौजूद रहे. इसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों ही अधिकारियों ने मामले पर एब्सील्यूट इनर्शिया अपना लिया है. यानी वो अपनी जगह से हिलने तक को तैयार नहीं हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. 

हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी की ड्यूटी लगाई है कि इस अरेस्ट वारंट को एग्जीक्यूट करते हुए दोनों अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए. फिलहाल दोनों ही अधिकारियों का अपने उस पद से ट्रांसफर हो चुका है, जिसमें याचिका दायर होने के दौरान वो तैनात थे. 

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