हिमाचल प्रदेश के स्कूलों के दाखिले के फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने का निर्देश दिया गया है. राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड (एचपीएससीडब्ल्यूबी) की बैठक में हिस्सा लिया था और इसकी अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार समाज से जाति आधारित भेदभाव खत्म करना चाहती है. साथ ही भाईचारे और समानता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा जाति का कॉलम हटाना इस दिशा में एक कदम होगा और इससे यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि बच्चों में जाति के आधार पर हीन भावना न आए.
हालांकि, सरकारी योजनाओं और फायदों का लाभ उठाने के लिए अनुसूचित जाति के लोगों को अपनी जाति की जानकारी देनी होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अनुसूचित जाति के लोगों की समस्याओं को हल करने को प्राथमिकता दे रही है. उनके कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. सभी पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे इनका लाभ उठा सकें.
छात्रों के लिए 20 लाख रुपये तक का लोन
सुक्खू ने कहा कि सरकार मेधावी छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का लोन भी उपलब्ध करा रही है. गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना' लागू करने जा रही है. इसके तहत पात्र परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी, जबकि इन परिवारों की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन प्रदान की जाएगी.
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में उनके विभाग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान से जुड़ी योजनाओं के लिए करीब 315 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.
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