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This Article is From Sep 28, 2019

दिल्ली पुलिस के इस अधिकारी को कहते हैं वर्दी वाला सोशल वर्कर, जानें इनके बारे में

देश की राजधानी दिल्ली में जामिया नगर में एसएचओ ने जहां अपने इलाक़े को क्राइम फ्री करने की मुहीम में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है

दिल्ली पुलिस के इस अधिकारी को कहते हैं वर्दी वाला सोशल वर्कर, जानें इनके बारे में
खूंखार लेडी डॉन बशीरन को उसके बेटों सहित गिरफ्तार करने का श्रेय भी उपेन्दर सिंह को ही जाता है
नई दिल्ली:

जो काम जनता के रहनुमाओं को करना चाहिए था वो पुलिस की वर्दी में एक अफसर कर रहा है. देश की राजधानी दिल्ली में जामिया नगर में एसएचओ ने जहां अपने इलाक़े को क्राइम फ्री करने की मुहीम में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है वही जनता को पुलिस से सीधे अपनी परेशानी के लिए थाने में ही प्रत्येक महीने आरडब्लूओ और सामाजिक संस्थाओं से मिलकर मीटिंग ही नहीं करते बल्कि उस मीटिंग में आने वाली समस्याओं से वाकिफ होने खुद भी निकल पड़ते है. उन्होंने अपना नंबर जनता में दे रखा है और उनका कहना है की जनता उनको कभी भी फ़ोन कर अपनी समस्या बता सकती है. अपने सहयोगियों के साथ देर रात गश्त करना लगभग रोज़ के मामूली सा हो गया है. यही वजह है की जामिया नगर में अपराधी या तो जेल में है या फिर इलाक़े से बाहर शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं. इलाक़े की यातायात समस्या के समाधान के लिए वो खुद इलाक़े के रहनुमानों से संपर्क साध कर हमेशा डिवाइडर को लगवाना उनकी खासियत गिनी जाती है. थाने में मेडिकल कैंप का आयोजन करना और सैकड़ों लोगो को दवाओं की व्यवस्था के साथ ज़रुरत मंद लोगो को ख़ामोशी से टेस्ट के लिए अपनी तरफ से रकम की मदद भी कर देते है. उपेन्दर जितना सड़क पर सक्रीय रहते है उतना है सोशल मीडिया में भी सक्रीय रहते है. उनका सोशल मीडिया पर जामिया नगर की जनता से अपील और सुझाव लगातार जारी रहता है. वो सोशल मीडिया पर मिलने वालों पर सुझाव पर भी अमल करने में नहीं चूकते, चाहे वो विभाग के किसी कर्मचारी की क्यों ना हो. 

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उपेन्दर सिंह को जब जामिया नगर थाने में पोस्टिंग की खबर मिली तो उस खबर के साथ ये खबर भी मिली की जामिया नगर में गोली का चलना आम बात है. ये गिरोह गोली की दहशत दिखाकर मकान और ज़मीन पर कब्ज़ा करता था. जिससे दहशत का माहौल हमेशा बना रहता है, उन्होंने ठाना की जामिया को क्राइम फ्री बनाना है. उसी कड़ी में हमने इलाक़े के बदमाशों को चेतावनी दी कि या जामिया नगर छोड़ दे या जेल जाएं, शुरू में तो परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन जब कई बड़े शातिर बदमाशों को जेल का रास्ता दिखाया तब अपराध थमा.  उपेन्दर कहते है कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत हम ज्यादा से ज्यादा लोगो की इंसानियत के तहत मदद की पहल करते है, हम भी इंसान है हमको भी दुःख और सुख का एहसास होता है और जब कोई बुज़ुर्ग थाने में आकर दुआ देते हुए सर पर हाथ फेरता है तो हमको दिल्ली पुलिस में रहते हुए इंसानियत के प्रति काम करने पर फक्र होता है. हम चाहते हैं कि जामिया नगर क्राइम फ्री रहे, यही वजह है की जब से हमने यहां का चार्ज लिया है तब से आज तक आम आदमी को कुर्सी और बदमाशों को हवालात का रास्ता दिखाया है. 

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 जामिया नगर से पहले उनकी पोस्टिंग संगम विहार थाने में एसएचओ के तौर पर थी जहां उन्होंने थाने में दरबार लगाकर जनता को तत्काल इंसाफ देने की प्रक्रिया शुरू की थी, इस प्रक्रिया में थाने में दोनों पक्षों को बुलाकर मामले को सुलझाने का  काम किया जाता था. साथ ही 51 शराब माफियाओं ने शराब बेचने से तौबाकर दूध-पनीर या ढाबा चला कर जहां अपने परिवार का पालन पोषण करने के साथ बच्चों को स्कूल भी शिक्षा कसम खाई. वही इलाक़े के जितेंद्र बहादुर सिंह नामक व्यक्ति ने डिप्रेशन में रहते हुए अपने 2 बच्चों को चाकू मारने के बाद खुद भी चाकू मार लिया था, जिसके बाद उक्त व्यक्ति की बाद में मौत हो गयी थी, उपेन्दर की पहल से उक्त परिवार का खर्च थाने के सभी स्टाफ ने अपनी तनख्वाह से रकम इकठ्ठा करके प्रत्येक महीने मदद के तौर देना शुरू किया, मृतक की पत्नी मीनाक्षी कहती है की जब अपने सगे साथ छोड़ देते है तब एक वर्दी में अफसर की पहल ने हमको जीने का रास्ता दिखाया, मेरे पास शब्द नहीं उनके लिए. उनकी इस पहल से वो काफी चर्चा में रहे थे. स्थानीय निवासी कहते है की पिकेट वही, पुलिस वही, डिवीज़न वही है, लेकिन एक कप्तान अच्छा आ गया है जिसके वजह से वही पुलिस गरीबों को दबा नहीं रही है, जो नहीं फंस रहा है उसे फंसा नहीं रही है, किसी की अपरोच के आगे उसको दबा नहीं रही है, उनकी  इस कम्युनिटी पुलिसिंग की पहल को जहां जनता सराह रही है. 

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रात लगभग 12 बजे थाने के कैम्पस में उपेन्दर अपने कई साथियों के साथ ही बैठे थे. साधारण पहनावे में एक महिला थाने में दाखिल होती है पुलिस कांस्टेबल से मदद के लिए कहती है जिसको देखते ही एसएचओ उठते है और मदद करने का वादा करते है. बात सुनकर मदद भी की लेकिन बाद में ये पता चला की ये महिला कोई और नहीं बल्कि ऑल इंडिया सिविल सर्विसज में 217वीं रैंक हासिल करके  IPS ऑफिसर बानी इल्मा अफरोज थी. इल्मा अफरोज संवाददाता से कहती है की ऐसे अफसर देश में हो जाये तो पुलिस और जनता के बीच की दूरी मिट जाये. वहीं दिल्ली पुलिस के आला अफसर तारीफ करते हुए कहते है की दिल्ली पुलिस की इस तरह की मिसालें है जिसकी काफी सराहना की जाती है, जिस तरह से हमारी कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत दिल्ली पुलिस का नाम रौशन करने वाले चाहे अधिकार हो, चाहे सिपाही हो, हवलदार हो, इंपेक्टर हो उनको आगे से आगे ले जाया जा सके ताकि दिल्ली पुलिस की छवि में और इज़ाफ़ा हो सके. 
 

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