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This Article is From Jun 09, 2018

सोनीपत से दिल्ली तक ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों सूख गई यमुना नदी

दिल्ली की प्यास बुझाने वाली यमुना नदी रेगिस्तान बन चुकी है. यमुना नगर से लेकर बागपत तक नदी में एक बूंद पानी नहीं.

सोनीपत से दिल्ली तक ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों सूख गई यमुना नदी
यमुना नदी
नई दिल्ली: दिल्ली की प्यास बुझाने वाली यमुना नदी रेगिस्तान बन चुकी है. यमुना नगर से लेकर बागपत तक नदी में एक बूंद पानी नहीं. इसके चलते गन्ना और सब्जी की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है. यमुना नगर से दिल्ली के बीच किस तरह यमुना नदी दम तोड़ रही है.  इसके लिए हम सोनीपत से दिल्ली तक यमुना नदी के साथ-साथ चले.  आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों 150 किमी तक यमुना सूख गई है...चार राज्यों के करोड़ों लोगों की प्यास बुझाने वाली यमुना नदी है. दूर दूर तक इस नदीं में न तो पानी है और न ही नदी होने के कोई एक भी निशान. यमुना नगर से बागपत तक करीब 150 किमी तक की नदी सूखकर अब रेगिस्तान बन चुकी है. चारों तरफ सिर्फ रेत और सूखे खेत हैं. 

सालों से यमुना नदी में सब्जी उगाने वाले प्रकाश ने बताया कि आखिर कैसे नदी सूखने पर खेती-किसानी पर भी सूखा पड़ जाता है. प्रकाश का कहना है कि यमुना में पानी ही नहीं है तो सब्जी कैसे उगेगी? खरबूजे की फसल उगाई थी, बरबाद हो गई लेकिन जिन किसानों ने यमुना नदी में पानी आने की आस में सब्जी उगाई, उसका काफी बुरा हश्र हो गया.

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यमुना नदी जब से सूखी तो उसके किनारे लगे गन्ने के खेत पर सूखे के संकट मंडराने लगे. बागपत के मांवीकलां गांव वालों की पूरी जिंदगी गन्ने के खेती पर निर्भर है. लेकिन यमुना नदी सूखने से बोरिंग फेल हो गई और गन्ना सूखने के कगार पर है. किसान की मानें तो पहले डेढ़ घंटे में चार बीघा खेत भर जाता था, अब यमुना नदी सूखने से अब पानी बहुत नीचे जा चुका है. वीरान और सूख गई यमुना नदी में अस्थियों और उनका राख भी लोग दबा कर चले गए कि जब इस नदी में पानी आएगा तो उनके पूर्वजों को मोक्ष मिल जाएगा.

स्थानीय निवासी सरनजीत बताते हैं कि यहां अंतिम संस्कार लोग करते हैं लेकिन पानी हैं नहीं. इसीलिए लोग अस्थियां दबाकर चले जाते हैं कि जब पानी आएगा तो उनका संस्कार हो जाएगा. यमुना नदी के साथ-साथ चलते हुए हमें ये तीन बड़े खंबे नजर आए लेकिन पता चला कि ये बहुत पुराने गांव के कुंए होते थे जो नदी के साथ सूख गए.

स्थानीय निवासी और पर्यायवरण के जानकार एसके महेश्वरी बताते हैं कि ये पुराने जमाने के कुएं हैं जो गांव में होते थे. नदी के रास्ता बदलने पर ये बीच में आ गए. अब ये भी सूख चुके हैं. 
करीब 150 किमी तक सूखी रहने के बाद अब दिल्ली-यूपी की सीमा पर पानी दिख रहा है. दरअसल यमुना नदी के सूखने के कई कारण हैं. 

यमुना नदी में बहाव के लिए 1800 क्यूसेक पानी की जरुरत है. लेकिन हथिनी कुंड बैराज में रोज़ाना 1348 क्यूसेक पानी ही आ रहा है. इसमें से 881 क्यूसेक पानी दिल्ली के लिए मूनक नहर में छोड़ा जाता है. 115 क्यूसेक पानी हरियाणा लेता है. बाकी सिर्फ 300 क्यूसेक पानी यमुना नदी के लिए बचता है. लेकिन कम पानी और सूखी नदी से खनन माफिया रोज़ाना करोड़ों कमा रहे हैं.

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बरसात में नदी में पानी आने से पहले ज्यादा से ज्यादा रेत निकालने के लिए सैकड़ों रेत के ट्रक नदी में खड़े हैं. आप अक्सर यहां जेसीबी मशीन द्वारा बालू निकालते और ट्रक में डालते देख सकते हैं. ये वैसी ही तस्वीर है जैसे किसी लाश का मांस नोचा जा रहा हो. वैसे ही मरती नदी से सैकड़ों ट्रक इस वक्त बालू निकाल रहे हैं. दिल्ली के पल्ला गांव के पास मूनक नहर का पानी यमुना नदी में आता है और फिर नदी तालाब जैसी नजर आने लगती है. यहां के पानी से ही दिल्ली वालों की प्यास बुझती है लेकिन यमुना नदी में पानी का सबसे बड़ा स्रोत ये नजफगढ़ का गंदा नाला है. पचास साल पहले ये यमुना नदी की सहायक नदी साहिबी होती थी जो अलवर से आकर यमुना नदी में मिलती थी. अब इस नदी का नाम बदलकर नजफगढ़ गंदा नाला हो चुका है. यमुना नदी दिल्ली में करीब 25 किमी का सफर तय करती है, जिसमें 22 बड़े नालों का हदारों लीटर गंदा पानी इसमें भरता है और सूखी नदी से गंदे नाले में यमुना बदल जाती है.

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