विज्ञापन

दिल्ली को जाम से राहत दिलाने वाले राकेश मेहता ने क्यों की खुदकुशी?

दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी बनने से पहले भी राकेश मेहता ने कई अहम काम किए. उनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि आज ट्रांसपोर्ट व्यवस्था इतनी शानदार है. उन्होंने दिल्ली के विकास के लिए क्या-क्या किया, जानें सबकुछ.

दिल्ली को जाम से राहत दिलाने वाले राकेश मेहता ने क्यों की खुदकुशी?
दिल्ली के विकास मेंअहम भूमिका निभाने वाले शख्स ने की आत्महत्या. (फाइल फोटो)
  • दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने 74 साल क उम्र में नोएडा स्थित अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली
  • राकेश मेहता ने सुसाइड नोट में बीमारियों से तंग आने की बात कही और इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया
  • वे 1975 बैच के आईएएस अधिकारी थे, जिन्होंने दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट और बुनियादी ढांचे में कई सुधार किए
नई दिल्ली:

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने 74 साल की उम्र में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. वह 1975 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी थे. ये वही अधिकारी थे, जिन्होंने दिल्ली की सड़कों को जाम से मुक्त कराने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और बुनियादी ढांचे में कई ऐतिहासिक सुधार किए. उन्होंने अपने करियर का 30 साल से ज्यादा समय दिल्ली की सेवा और तरक्की में बिताया.एक प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते उन्होंने दिल्ली के लिए बहुत काम किया. दिल्ली को आज जाम से बहुत हद तक राहत दिलाने का क्रेडिट भी उनको ही जाता है. 

राकेश मेहता ने क्यों किया सुसाइड?

रकेश मेहता ने नोएडा स्थित अपने घर पर फांसी लगाकर खुदकुशी की. पुलिस को मौके से अंग्रेजी में लिखा एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने बीमारियों से तंग आकर यह कदम उठाने की बात कही. उन्होंने किसी को भी इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है. मूल रूप से देहरादून के रहने वाले राकेश मेहता की पत्नी सुमंती मेहता भी दिल्ली कैडर की रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं. घटना के समय वह देहरादून के वसंत विहार में अपने बेटे के पास गई हुई थीं, जो वहां रहकर पीएचडी कर रहा है. उनकी एक बेटी भी है, जो शादी के बाद लंदन में रहती है.

दिल्ली में कई सीनियर पदों पर रहे

राकेश मेहता ने दिल्ली सरकार और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली में कई सीनियर पदों पर सेवाएं दीं. साल 2007 में उनको शहर का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया, इस पद पर वह नवंबर 2010 में रिटायर होने तक रहे. मतलब 3 साल से ज्यादा समय तक वह दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी रहे.

दिल्ली को जाम से काफी हद तक राहत दिलाई

राकेश मेहता का दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ खास जुड़ाव रहा. इसकी वजह यह रही कि उन्होंने अपने करियर का ज्यादातर समय शीला दीक्षित के साथ काम किया. इसी दौरान दिल्ली में बुनियादी ढांचे और प्रशासन से जुड़े कई अहम सुधार किए गए. उन्होंने दिल्ली को जाम से राहत दिलाने के लिए बुनियादी ढांचे का ऐसा जाल बिछाया कि लोग आज बढ़िया सफर का कम समय में कर पाते हैं.

शीला दीक्षित संग काम किया, कई अहम सुधार किए

दिल्ली के पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने राकेश मेहता को उनके कामकाज के लिए याद किया. लवली के मुताबिक, राकेश मेहता दिल्ली को तरक्की की राहत पर आगे ले जाने वाली नीतियों को लागू करने के हमेशा समर्थक रहे. उनके पूर्व सहयोगी भी उनको ऐसे अधिकारी के तौर पर याद कर रहे हैं जो अपनी नौकरी की चिंता किए बिना शहर में बदलाव लाने के लिए खुद आगे बढ़कर काम करते थे. 

Latest and Breaking News on NDTV

राकेश मेहता के करियर के बारे में जानें

दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी बनने से पहले राकेश मेहता ने कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं. उनकी मुख्य भूमिका दिल्ली की नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में रही. उन्होंने दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर के तौर पर भी सेवाएं दीं. उनके बिजली सचिव रहते ही दिल्ली में बिजली वितरण का निजीकरण हुआ. उनके परिवहन विभाग में प्रधान सचिव रहते ही शहर का पब्लिक बस नेटवर्क नए सिरे से तैयार किया गया. विकास के इन कार्यों में उनकी अहम भूमिका रही. 

दिल्ली से ब्लू लाइन बसों को हटाने का क्रेडिट

रकेश मेहता 'ब्लूलाइन बस संकट' की जांच कर रही दिल्ली सरकार की समिति में प्रधान सचिव रहे. इससे ये पता चलता है कि दिल्ली के मुख्य सचिव का पद संभालने से बहुत पहले ही वह शहर के विकास में अहम भूमिका निभाते रहे. 

दिल्ली की सूरत बदलने में अहम भूमिका

दिल्ली में कई अहम नागरिक सुधारों को आगे बढ़ाने का श्रेय राकेश मेहता को जाता है. बिजली सचिव रहते उनकी शहर के बिजली वितरण नेटवर्क के ऐतिहासिक निजीकरण में अहम भूमिका रही. वहीं प्रॉपर्टी टैक्स के केल्कुलेशन के लिए 'यूनिट एरिया मेथड' भी उन्होंने ही शुरू किया.

ब्लूलाइन बसें हटाकर लो फ्लोर बसें लाए

उन्होंने ही दिल्ली में हादसों को बढ़ावा देने वाली 'ब्लूलाइन बसों' को हटाने और उनकी जगह 'लो-फ्लोर बसें' लाने की योजना तैयार करने में भी मदद की. उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी (ट्रांसपोर्ट) रहते दिल्ली के बेड़े में करीब 2,500 लो-फ्लोर बसें शामिल की गईं. लाइन बसों को पूरी तरह से हटाने को लेकर दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी बनने के बाद भी उनकी कोशिशें जारी रहीं.2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में भी उनका अहम योगदान रहा, उस समय वह इसकी देखरेख करने वाले मुख्य अधिकारी थे. इस तरह दिल्ली के विकास में उनका अहम योगदान रहा.

ये भी पढ़ें-दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने किया सुसाइड, पंखे से लटका मिला शव

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Delhi News, Rakesh Mehta, Rakesh Mehta Case, Delhi Suicide, Delhi IAS Officer
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com