नई दिल्ली:
दो महीने से पुलिस के साथ आंख मिचौली खेल रहा स्वीकार लूथरा आखिरकार दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ गया. लूथरा पर देश के कई राज्यों में नकली सिक्के बनाने और उसकी सप्लाई करने का आरोप है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे मोहन गार्डन इलाके से गिरफ्तार किया. पुलिस ने इसके पास से 17,390 रुपये के 5 और 10 रुपये के नकली सिक्के भी बरामद किए हैं
ऐसा नहीं है कि स्वीकार लूथरा पहली बार पुलिस की गिरफ्त में आया है. वह इससे पहले भी कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन जितनी बार भी ये पकड़ा गया, हर बार इसका नाम अलग होता था. इस बार इसके सही नाम का पता चल पाया है. गिरफ्त में आने के बाद इसने जो खुलासा किया वो चौंका देने वाला है. पुलिस की मानें तो यह 19 साल से इस कारोबार में शामिल है और अपने भाई उपकार लूथरा के साथ मिलकर सन 1997 से ये नकली सिक्के बना रहा है.
स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव के मुताबिक स्वीकार लूथरा का विदेशों में भी नेटवर्क फैला हुआ है. नकली सिक्के बनाने वाले इस गैंग का टारगेट देश के अलग-अलग राज्यों के टोल, साप्ताहिक बाजार और वो जगह होती थी, जहां पर खुले पैसों की ज्यादा जरूरत पड़ती है. ये 1000 रुपये के सिक्के के बदले 1100 रुपये लेता था.
दअरसल दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर के महीने एक फैक्ट्री पर छापा मारकर गुलशन और सचिन नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से तकरीबन 6 लाख रुपये के 5 के और 10 के नकली सिक्के बरामद किए थे. गिरफ्तारी के बाद गुलशन और सचिन ने पुलिस को बताया था कि नकली सिक्के बनाने का मास्टरमाइंड स्वीकार लूथरा और उसका भाई उपकार लूथरा है. दोनों भाइयों ने दिल्ली, राजस्थान, बिहार और हरियाणा में नकली सिक्कों के कारखाने लगाए थे. पुलिस अब इसके भाई उपकार लूथरा की तलाश कर रही है.
ऐसा नहीं है कि स्वीकार लूथरा पहली बार पुलिस की गिरफ्त में आया है. वह इससे पहले भी कई बार गिरफ्तार हुआ, लेकिन जितनी बार भी ये पकड़ा गया, हर बार इसका नाम अलग होता था. इस बार इसके सही नाम का पता चल पाया है. गिरफ्त में आने के बाद इसने जो खुलासा किया वो चौंका देने वाला है. पुलिस की मानें तो यह 19 साल से इस कारोबार में शामिल है और अपने भाई उपकार लूथरा के साथ मिलकर सन 1997 से ये नकली सिक्के बना रहा है.
स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव यादव के मुताबिक स्वीकार लूथरा का विदेशों में भी नेटवर्क फैला हुआ है. नकली सिक्के बनाने वाले इस गैंग का टारगेट देश के अलग-अलग राज्यों के टोल, साप्ताहिक बाजार और वो जगह होती थी, जहां पर खुले पैसों की ज्यादा जरूरत पड़ती है. ये 1000 रुपये के सिक्के के बदले 1100 रुपये लेता था.
दअरसल दिल्ली पुलिस ने अक्टूबर के महीने एक फैक्ट्री पर छापा मारकर गुलशन और सचिन नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से तकरीबन 6 लाख रुपये के 5 के और 10 के नकली सिक्के बरामद किए थे. गिरफ्तारी के बाद गुलशन और सचिन ने पुलिस को बताया था कि नकली सिक्के बनाने का मास्टरमाइंड स्वीकार लूथरा और उसका भाई उपकार लूथरा है. दोनों भाइयों ने दिल्ली, राजस्थान, बिहार और हरियाणा में नकली सिक्कों के कारखाने लगाए थे. पुलिस अब इसके भाई उपकार लूथरा की तलाश कर रही है.
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