167 साल पहले आज ही दिन, 22 मई 1859 को एडिनबर्ग में जन्मा एक लड़का आगे चलकर दुनिया का सबसे मशहूर जासूस रचेगा, यह शायद किसी ने भी नहीं सोचा होगा. लेकिन सर आर्थर कॉनन डॉयल ने शरलॉक होम्स जैसे जासूस की रचना की, जो अपराधियों के दिमाग को पढ़ लेता था, छोटी से छोटी बात को पकड़ लेता था और हर रहस्य से पर्दा हटा देने में माहिर था. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सर आर्थर कॉनन डॉयल सिर्फ रहस्य और जासूसी की दुनिया के उस्ताद नहीं थे. उनका दूसरा बड़ा जुनून था क्रिकेट.
जी हां, आर्थर कॉनन डॉयल सिर्फ लेखक या डॉक्टर ही नहीं थे, बल्कि एक क्रिकेट खिलाड़ी भी थे. मेडिकल की पढ़ाई करने वाले इस शख्स ने मरीज भी देखे, युद्ध पर भी लिखा, आध्यात्म पर भी बहस की और साथ ही क्रिकेट के मैदान पर अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई.
सर आर्थर कॉनन डॉयल का क्रिकेट कनेक्शन
क्रिकेट से उनका रिश्ता सिर्फ दर्शक वाला नहीं था. वे खुद क्रिकेट खेलते थे, विकेट लेते थे, बल्लेबाजों को अपनी गेंदों से उलझाते और क्रिकेट पर ऐसी कहानियां लिखते थे जिनमें रहस्य, कल्पना और खेल तीनों का मेल दिखाई देता था.
आज क्रिकेट पूरी तरह डेटा, एनालिटिक्स और टेक्नोलॉजी का खेल बन चुका है, पर आर्थर कॉनन डॉयल के दौर में क्रिकेट कल्पना और दिमागी खेल की बिसात था. शायद इसी वजह से आर्थर कॉनन डॉयल क्रिकेट को सिर्फ बैट और बॉल का खेल नहीं, बल्कि एक मिस्ट्री की तरह भी देखते थे.
दिलचस्प बात ये है कि अपने 10 फर्स्ट क्लास मैचों में से पहला उन्होंने 41 साल की उम्र में खेला था. डॉयल एक ठीक-ठाक बल्लेबाज थे पर उनकी स्लो गेंदें बल्लेबाजों को खूब उलझाती थीं. उनकी गेंदों में ऐसी रहस्यमयी फ्लाइट होती थी कि बल्लेबाज समझ ही नहीं पाते थे कि गेंद आखिर करेगी क्या. एक बार लॉर्ड्स के मैदान पर कैम्ब्रिजशर के खिलाफ 61 रन देकर 7 विकेट झटकने के उनके कारनामे का जिक्र भी किया गया है.
शरलॉक होम्स का नाम कैसे पड़ा?
ऐसा भी माना जाता है कि शरलॉक होम्स का नाम नॉटिंघमशर के दो क्रिकेटरों, विकेटकीपर मॉरदेकाई शेरविन और गेंदबाज फ्रैंक शैकलॉक, के नामों को मिलाकर बना था. उन दिनों स्कोरबुक में अक्सर लिखा जाता था- कॉट शेरविन बोल्ड शैकलॉक, और माना जाता है कि यहीं से शरलॉक का नाम उनके जेहन में आया.
सबसे मजेदार बात तो ये है कि मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब की तरफ से खेलते हुए आर्थर कॉनन डॉयल ने क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में शुमार डब्ल्यू जी ग्रेस को भी विकेटकीपर के हाथों कैच आउट कराया था. और इस जोरदार उपलब्धि से वे इतने खुश हुए कि खुद की तारीफ में 19 छंदों की एक कविता तक लिख डाली.

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क्रिकेट की सबसे रहस्यमयी कहानी
इतना ही नहीं, उन्होंने क्रिकेट पर एक मशहूर और क्लासिक शॉर्ट स्टोरी भी लिखी थी- स्पेदग्यू ड्रॉपर, जिसमें एक ऐसी रहस्यमयी गेंद का जिक्र था जो आसमान से गिरती हुई लगती थी और बल्लेबाजों को पूरी तरह भ्रमित कर बोल्ड कर देती थी.
इस कहानी का नायक था टॉम स्पेदेग, जो अस्थमा से पीड़ित एक कमजोर दिल वाला स्कूल मास्टर था, लेकिन उसके पास एक अजीब सी गेंद डालने की कला थी. वह दो 50 फीट ऊंचे पेड़ों के बीच रस्सी बांधकर अभ्यास करता था और गेंद को इतना ऊंचा फेंकता था कि वह बादलों से गिरती हुई लगती थी.
कहानी में यही गेंद उसे गांव के क्रिकेट से उठाकर सीधे एशेज सिरीज तक पहुंचा देती है, जहां वह ऑस्ट्रेलिया को हराने वाला हीरो बन जाता है.
मैच जीतने के बाद उसे कंधों पर उठाकर मैदान से बाहर ले जाया जाता है, लेकिन डॉक्टर उसे क्रिकेट छोड़ने की सलाह दे देते हैं.
ये कहानी दिखाती है कि सर आर्थर कॉनन डॉयल क्रिकेट को कितनी गहराई से देखते थे और इसे लेकर उनकी कल्पना की उड़ान किस ऊंचाई तक पहुंचती थी.

सर आर्थर कॉनन डॉयल
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लेकिन डॉयल को यह आइडिया कहां से मिला?
यही असली रहस्य था. क्रिकेट इतिहासकारों का मानना है कि डॉयल ने यह विचार 1880 के दशक की एक मशहूर क्रिकेट किताब से लिया था.
यह किताब थी: क्रिकेट , जिसे एजी स्टील और आरएच लिटेल्टन ने लिखा था. उस दौर में इसकी गिनती क्रिकेट की कोचिंग किताबों में होती थी.
इस किताब में 'हाई ड्रॉपिंग फुल पिच' नाम की गेंद का जिक्र था, जिसके बारे में लिखा गया था कि- गेंद जितनी ऊंची जाएगी, बल्लेबाज के लिए उतनी ही मुश्किल होगी. गेंद बल्लेबाज के सिर के ऊपर अपनी सबसे ऊंची स्थिति में पहुंचनी चाहिए और फिर सीधे स्टंप के ऊपर गिरनी चाहिए.
उसमें यह भी लिखा गया था कि आक्रामक बल्लेबाज उस गेंद को बुरी तरह मार सकते हैं, पर डिफेंसिव बल्लेबाज इस गेंद पर बुरी तरह उलझ सकते हैं.
क्रिकेट को रहस्य की तरह देखते थे डॉयल
असल में कॉनन डॉयल क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं मानते थे. उनके लिए बल्लेबाज एक पहेली था. हर गेंद एक चाल थी. और विकेट एक तरह का समाधान था, ठीक उसी तरह जैसे शरलॉक होम्स किसी भी अपराध को झटके में सुलझा लेता था.
उनकी कहानियों में उनकी गेंदबाजी की तरह ही एक मकसद होता था, सामने वाले को भ्रमित करना.
सर आर्थर कॉनन डॉयल उन चुनिंदा लोगों में से हैं जिन्होंने साहित्य, चिकित्सा और खेल तीनों ही दुनिया में अपने हाथ आजमाए. पर जिस तरह से उन्होंने शरलॉक होम्स का किरदार बनाया और उसके लिए ही मशहूर हुए वैसा नाम क्रिकेट में नहीं कमाया पर उनका यह छोटा लेकिन जानने योग्य क्रिकेट कनेक्शन याद रखा जाएगा.
क्योंकि इस स्टोरी को पढ़ने और क्रिकेट को जानने, समझने वाले जब भी क्रिकेट में किसी रहस्यमयी स्लो गेंद को हवा में तैरते और विकेट चटकाने का कारनामा करते देखेंगे तो कहीं न कहीं उनके जेहन में आर्थर कॉनन डॉयल की वो रहस्यमयी गेंद भी तैरती महसूस होगी.
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