India vs Sri Lanka Untold Story: आइये चलते हैं क्रिकेट इतिहास के उस हिस्से में जहां एक नई टीम का उदय हो रहा था और वो भी उस समय के सबसे खास फॉर्मेट में जिसका जलवा आज भी बरकरार है. क्रिकेट के किसी भी खिलाड़ी के लिए ये किसी कुंभ से कम नहीं है. जी हां हम बात कर रहे हैं टेस्ट क्रिकेट की और टीम का नाम था श्रीलंका. सात समंदर पार की कहानी को लेते हुए चलिए एक बार फिर वहीं लौट चलते हैं. साल 1981 में टेस्ट दर्जा प्राप्त करने वाली श्रीलंका टीम लगातार बड़ी टीमों से मुकाबला हारते हुए आगे बढ़ रहा था, मानों वो खुद को कही खड़ा नहीं पा रहा था और ऐसे में अगले 4 साल में उन्हें एक भी जीत हासिल नहीं हुई, यहां से फिर वो मौका आया साल 1985 और मुकाबला तय था श्रीलंका और भारत के बीच टेस्ट क्रिकेट का, जहां श्रीलंका के पास एक बड़ा मौका था खुद के वजूद को टेस्ट क्रिकेट में साबित करने का और इसे वो बड़े मौके की तरह ही सोच रहे होंगे
इधर टीम इंडिया के खिलाफ जीत का सपना देखना भी श्रीलंका के लिए बड़ी चुनौती था क्योंकि भारतीय टीम में भी सितारों की भरमार थी, टीम में कपिल देव, सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री, मोहिंदर अमरनाथ और युवा स्टार मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे बड़े नाम शामिल थें और इन नामों के साथ टीम इंडिया कागज पर भी बहुत मजबूत नजर आ रही थी
पहला टेस्ट ड्रॉ होने से मिल गया था संकेत
कोलंबो के SSC मैदान पर पहला टेस्ट ड्रॉ रहा. श्रीलंका की ओर से युवा अर्जुना रणतुंगा ने शानदार 111 रन बनाए, जिससे साफ हो गया कि मेजबान टीम अब सिर्फ सीखने नहीं, लड़ने भी लगी है.
दूसरा टेस्ट मैच जहां लिखा गया इतिहास
कोलंबो के पी. सरवनमुत्तु स्टेडियम में 6 सितंबर 1985 को दूसरा टेस्ट शुरू हुआ. इस मुकाबले में श्रीलंका ने पहली पारी में 385 रन बनाए जिसमे अमल सिल्वा ने 111 रन की शानदार शतकीय पारी खेली थी. जवाब में भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 244 रन ही बना सकी. इसके बाद श्रीलंका ने दूसरी पारी में 3 विकेट खोकर 206 पर घोषित कर भारत के सामने 347 रन का कठिन लक्ष्य रखा. जवाब में भारतीय बल्लेबाजी फिर लड़खड़ा गई और पूरी टीम 198 रन पर आउट हो गई और श्रीलंका ने 149 रन से मैच जीत लिया.
रुमेश रत्नायके बने भारत के लिए सिरदर्द
तेज गेंदबाज रुमेश रत्नायके ने दोनों पारियों में कहर बरपाया. भारत के दिग्गज बल्लेबाज उनकी गेंदबाजी का जवाब नहीं ढूंढ पाए और दूसरी पारी में उन्होंने 5 विकेट लिए और पूरी सीरीज में कुल 20 विकेट झटके. यही वह दौर था जब युवा अरविंदा डी सिल्वा दुनिया के सामने उभर रहे थे. उन्होंने दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में 75 रन बनाकर भारत की मुश्किलें और बढ़ा दीं.
सिर्फ जीत नहीं, एक संदेश था
भारत और श्रीलंका के बीच तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा और श्रीलंका ने सीरीज 1-0 से जीत ली. यह उसकी टेस्ट क्रिकेट में पहली जीत थी. इस जीत ने दुनिया को बता दिया कि श्रीलंका अब नई टीम नहीं रहा. आगे चलकर इसी देश ने रणतुंगा, जयसूर्या, मुरलीधरन, जयवर्धने और संगकारा जैसे दिग्गज दिए.
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