साल 2015 वर्ल्ड कप भी भारत के लिए साल 2019 की तरह ही रहा था. इन दोनों ही वर्ल्ड कप में भारत का सफर सेमीफाइनल तक ही खिंच सकता था. और यह निराशा अभी भी करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों को सालती है. हालांकि, शमी ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और अब शमी ने इस संस्करण में खुद को लेकर एक खुलासा किया है. शमी ने उमेश यादव के बाद भारत के लिए दूसरे सबसे सफल गेंदबाज रहे थे. इस विश्व कप में शमी ने 7 मैचों में 17.29 के औसत से कुल 17 विकेट चटकाए थे, जबकि उमेश यादव ने 18 विकेट लिए थे. बहरहाल, शमी के खुलासे पर लौटते हैं, जो उन्होंने इरफान पठान के साथ इंस्टाग्राम पर किया. दोनों खिलाड़ियों बहुत देर तक कई विषयों पर एक-दूसरे से बात की.
विश्व कप के अपने अनुभव पर शमी ने कहा कि वह हर मैच में तीन पेनकिलर्स गोली और इंजक्शन लिया करते थे क्योंकि उनके घुटने में फ्रेक्चर था. शमी ने ककहा कि कभी-कभी इतना महत्वपूर्ण मैच होता है कि आप जानते हो कि आपको हर हाल में खेलना है. साल 2015 वर्ल्ड कप में मेरे घुटने में चोट थी. यहां तक कि मैं चलने में भी असमर्थ था
शमी ने कहा कि मैं दर्द निवारक दवाएं और इंजेक्शन लिया करता था. ऐसे में फिजियो नितिन पटेल ने खासी मदद की और उन्होंने मुझे टूर्नामेंट में खेलने का भरोसा दिया. मेरे घुटने को ऑपरेशन की जरूरत थी. पटेल ने कहा कि अगर मैं दर्द सहन कर सकता हूं, तो मैं वर्ल्ड कप खेल सकता हूं.
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टूर्नामेंट के पहले ही मैच में मेरे घुटने में फ्रेक्चर हो गया. मेरी जांघ और घुटने का आकार एक जैसा हो गया था. डॉक्टरों को हर दिन घुटने से फ्लूड निकालना होता था. और दिन में तीन बार मुझे दर्द निवारक दवा लेनी पड़ती थी. बहरहाल, इतनी चोट के बावजूद शमी ने इतना शानदार प्रदर्शन किया. और अगर वह पूरी तरह फिट होते, तो निश्चित ही वह और भी कहीं ज्यादा विकेट लेते.
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