रविवार शाम दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में श्रीलंका के ख़िलाफ़ महिला एशिया कप फ़ाइनल में जीत के दौरान ICC आचार संहिता के लेवल 1 के उल्लंघन के लिए भारत की तेज़ गेंदबाज़ क्रांति गौड़ पर उनकी मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने सोमवार को पुष्टि की कि क्रांति ने खिलाड़ी आचार संहिता के अनुच्छेद 2.5 का उल्लंघन किया है. इसमें ऐसी भाषा, हरकत या इशारे शामिल हैं जो किसी बल्लेबाज़ के आउट होने पर उनका अपमान करते हैं या आक्रामक प्रतिक्रिया भड़का सकते हैं.
यह घटना श्रीलंका की पारी के शुरुआती ओवर में हुई, जब क्रांति ने ओपनर इमेशा दुलानी को बोल्ड किया और पवेलियन की ओर इशारा किया. आर्थिक जुर्माने के अलावा, क्रांति के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया; यह 24 महीने की अवधि में उनका पहला अपराध था.
ICC इंटरनेशनल पैनल की मैच रेफरी सुप्रिया रानी दास ने यह सज़ा तब तय की जब ऑन-फ़ील्ड अंपायर सलीमा इम्तियाज़ और शथिरा ज़ाकिर जेसी ने आरोप लगाए, और साथ में थर्ड अंपायर रोकेया सुल्ताना और चौथे अंपायर हुमैरा फराह भी शामिल थीं. ICC ने आगे कहा कि क्रांति ने आरोप स्वीकार कर लिया और सज़ा भी मान ली, जिससे औपचारिक सुनवाई की ज़रूरत नहीं पड़ी. ICC के नियमों के तहत, लेवल 1 के अपराधों के लिए खिलाड़ी की मैच फ़ीस का अधिकतम 50 प्रतिशत जुर्माना और दो तक डिमेरिट पॉइंट दिए जा सकते हैं.
भारत ने रविवार के फाइनल में श्रीलंका को 72 रनों से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार महिला एशिया कप का ख़िताब जीता और 2024 में गंवाया हुआ ख़िताब वापस हासिल किया. हालाँकि, हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी लेने से इनकार कर दिया, जो पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं.
एक अलग फ़ैसले में, शुक्रवार को श्रीलंका के हाथों सेमीफ़ाइनल में हार के दौरान धीमी ओवर-रेट बनाए रखने के लिए पाकिस्तान पर उनकी मैच फ़ीस का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया गया. मैच रेफरी जी.एस. लक्ष्मी ने पाकिस्तान पर जुर्माना लगाया क्योंकि समय की छूट को ध्यान में रखने के बाद भी वे अपने लक्ष्य से एक ओवर पीछे पाए गए. ICC कोड ऑफ़ कंडक्ट के आर्टिकल 2.22 के तहत, अगर कोई टीम तय समय में अपने ओवर पूरे नहीं कर पाती है, तो खिलाड़ियों की मैच फ़ीस का पांच प्रतिशत हिस्सा हर ओवर के लिए काट लिया जाता है.
पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने अपनी गलती मानी और सजा स्वीकार कर ली. ऑन-फ़ील्ड अंपायर वृंदा राठी और शथिरा जाकिर जेसी, थर्ड अंपायर रोकैया सुल्ताना और चौथे अंपायर रबाब अहसान ने यह आरोप लगाया था.
(IANS इनपुट के साथ)
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