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IPL 2026: 'वैभव की बैकलिफ्ट लारा की, तो हेड पोजीशन यंग तेंदुलकर की तरह', राजस्थान के हेड ऑफ क्रिकेट ने डिकोड की बैटिंग

coach on Vaibhav: मंगलवार को वैभव के अनुभवी जसप्रीत बुमराह को मात देने के बाद पूरे क्रिकेट जगत में इस 15 साल के सुपर किड की बैटिंग कीचर्चा है

IPL 2026:  'वैभव की बैकलिफ्ट लारा की, तो हेड पोजीशन यंग तेंदुलकर की तरह', राजस्थान के हेड ऑफ क्रिकेट ने डिकोड की बैटिंग
Indian Premier League 2026:
X: socal medai

मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में भले वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) ने पारी छोटी खेली, लेकिन उसका असर बहुत ही गहरा हुआ है. और इसकी सबसे बड़ी वजह बना वैभव का दुनिया के फिलहाल नंबर-1 गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की 5 गेंदों पर 2 छक्कों से 14 रन बनाना. बुमराह को घायल करने के बाद सूर्यवंशी की चर्चा एक अलग ही स्तर पर पहुंच गई है. जब जसप्रीत बुमराह की पहली गेंद लेग और मिडिल स्टंप पर स्लॉट में पड़ी, तब तक वैभव सूर्यवंशी का बल्ला ठीक वहीं मौजूद था, जहां उसे होना चाहिए था. गेंद लॉन्ग‑ऑन स्टैंड्स की ओर उड़ चली. यह तस्वीर क्रिकेट देख रहे हर शख्स की चेतना में दर्ज हो चुकी थी. इस बारे में राजस्थान रॉयल्स के डॉयरेक्टर ऑफ हाई परफॉरमेंस जुबिन भरूचा ने कहा, 'हर बार जब कोई कहता है कि उसका बैकलिफ्ट बहुत ऊंचा है, और इससे उसे परेशानी होगी, तो मुझे हंसी आती है. वह 155 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आने वाली गेंदों को ध्वस्त कर रहा है, जसप्रीत बुमराह और जोफ्रा आर्चर जैसे गेंदबाज़ों को मार रहा है. यही उसकी ताकत है, यही उसे खास बनाती है.' भरूचा के मुताबिक उस बैकलिफ्ट की बुनियादी खूबी यह है कि वह क्या पैदा करता है. वह समय और स्पेस पैदा करता है. यही वे चीज़ें हैं, जिनकी बल्लेबाज़ों को चाह होती है, लेकिन बेहतरीन रफ्तार के खिलाफ पाना बेहद मुश्किल होता है.'

उन्होंने कहा, 'यह डर कि ऊंचा बैकलिफ्ट उसे गेंद पर देरी कर देगा, पूरी तरह उलटा है. वही बैट स्विंग दरअसल समय पैदा करता है. यानी जिसे खेल की भाषा में ‘लेट खेलना' कहा जाता है. बैट जितना पीछे जाता है, उतना समय बनता है और जितना चौड़ा जाता है, उतना स्पेस. यही उसकी अनोखी बैटिंग डीएनए है.' भरूचा को याद है जब उन्होंने पहली बार 13 साल के सूर्यवंशी को ट्रायल्स में देखा था. पहले उन्होंने उसकी चाल देखी, फिर बल्ला पकड़ने का तरीका. मैंन पूछा-तुम्हारा फेवरेट खिलाड़ी कौन है? और फिर बिना जवाब का इंतज़ार 
मैं बोला-ऋषभ पंत. लेकिन वैभव ने तुरंत इनकार कर दिया. 'नहीं सर, ब्रायन लारा.' भरूचा चौंक गए. वजह यह थी कि  बिहार का एक 13 साल का बच्चा, जो लारा के रिटायर होने के बाद पैदा हुआ, शायद उसने उन्हें सिर्फ यूट्यूब पर देखा होगा.

लारा को पसंद करना एक बात है. लेकिन क्या महान बल्लेबाज़ की कोई छाप नजर आती थी? भरूचा को ज़्यादा तलाशने की ज़रूरत नहीं पड़ी. जैसे ही सूर्यवंशी ने पहली गेंद खेलने के लिए बल्ला उठाया, ऊंचे बैकलिफ्ट ने उन्हें पहचान वाली मुस्कान दे दी. भरूचा कहते हैं, 'संजू सैमसन का बैकलिफ्ट सिर के पास बहुत ऊपर जाता है. रियान पराग का और भी आगे. ध्रुव जुरेल बीच में हैं, तो  यशस्वी जायसवाल का भी काफी ऊंचा जाता है. इन सबके लिए इसे प्रोत्साहित किया जाता है. लेकिन वैभव के मुकाबले कोई नहीं. उसकी कलाई पीछे और चौड़ी, दोनों दिशाओं में और भी ज्यादा स्नैप करती है.'

कितना पीछे? इस पर राजस्थान हाई परफॉरमेंस कोच ने कहा, 'देखिए कितना पीछे जाता है? वर्टिकल से भी आगे, फिर कलाई ऐसे कॉक होती है, जैसे कैटापल्ट. बल्ला हाथों के आगे तक चला जाता है. लगभग 180 डिग्री. यह बेहद दुर्लभ है. मैं कहूंगा कि उस पोज़िशन में पहुंचना संभव ही नहीं होना चाहिए, लेकिन वैभव इसे बिल्कुल नैसर्गिक ढंग से करता है.' अगर हाथ लारा की याद दिलाते हैं, तो सिर सचिन तेंदुलकर की.

उन्होंने कहा, ' क्रीज़ पर गेंदबाज़ का इंतज़ार करते वक्त उसका सिर गौर से देखिए. वह लगभग पंजों के ऊपर होता है, और स्टंप के बाहर भी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह कहां खड़ा है.' क्रिकेट के शुद्धतावादी इसे ‘सिर गिरना' मानते हैं. यही परंपरागत ढांचा है.' भरूचा बोले,  'अगर आप समझें कि शरीर का ऊपरी और निचला हिस्सा स्वतंत्र रूप से काम करता है, तो आप जानेंगे कि सिर पूरी तरह झुका हो सकता है. फिर भी पैर सीधे गेंद की ओर जा सकते हैं. मैं कहूंगा कि वैभव जैसे हर बल्लेबाज़ के लिए सिर गिरने देना चाहिए. पीठ का वह झुकाव, जो सिर की यह स्थिति बनाता है, दरअसल एक सक्षम करने वाला तत्व है.'

भरूचा  वैभव की बैटिंग को और डिकोड करते हुए कहते हैं, 'गेंद कभी भी उसकी आंखों की रेखा से बाहर नहीं जाती, बल्कि लगभग हमेशा आइलाइन के अंदर रहती है क्योंकि वह गेंद की ओर बढ़ता है. यही वजह है कि वह ऑफ‑स्टंप लाइन की गेंद को भी जरूरत पड़ने पर लेग‑साइड में मार सकता है. यह उसे स्वाभाविक रूप से गेंद की ओर ले जाता है.' फिर भरूचा सचिन तेंदुलकर के बारे में कुछ ऐसा कहते हैं जो चौंका देता है.

उन्होंने कहा, 'युवा सचिन तेंदुलकर के वीडियो और तस्वीरें निकालिए. उनका सिर आगे के पैर के ऊपर, ऑफ‑स्टंप के बाहर होता था. नतीजतन, युवा सचिन को कभी LBW की समस्या नहीं रही. बाद में, जब उन्होंने ज्यादा सीधी, खड़ी स्टांस अपनाई. शायद पीठ की समस्याओं के कारण. तभी वह LBW आने लगे. तुलना यूं ही नहीं है. यह निदानात्मक है. वही सिर की स्थिति, जिसे पाठ्यपुस्तकें खराबी मानती हैं, इतिहास के महानतम बल्लेबाज़ को अपने करियर के शुरुआती हिस्से में LBW से बचाए रखती थी. हाथ और सिर के बाद क्या बचता है? पैर. बैक‑फुट का स्वाभाविक रूप से आगे आना जरूरी है ताकि संतुलन बना रहे और बल्लेबाज़ गेंद की ओर जा सके. जब बैक‑फुट नहीं चलता, तभी ‘गिरते सिर' की समस्या बनती है. युवा तेंदुलकर की तरह, वैभव का बैक‑फुट तालमेल में चलता है. इसलिए वह बिल्कुल सही स्थिति में होता है.'


 

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