Gautam Gambhir Vs Brendon McCullum, IND vs ENG: टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत के 'गंभीर' का सामना इंग्लैंड के 'मैकुलम' से भी होगा दोनों हाई-प्रोफाइल कोच को अपनी रणनीति के लिए जाना जाता है. आज सेमीफाइनल में जब भारत और इंग्लैंड की टीम आमने-सामने होगी तो यह सिर्फ खिलाड़ियों के बीच एक दूसरे से अलग निकलने की जंग नहीं होगी बल्कि कोच के तौर पर गंभीर और मैकुलम के बीच भी रणनीतियों को लेकर जंग होगी. आज यह देखना दिलचस्प होगा कि गंभीर और मैकुलम में किस कोच की रणनीति काम करती है.
गौतम गंभीर बतौर कोच
आउट ऑफ बॉक्स सोच
गंभीर "पुराने ज़माने" के तरीके को सपोर्ट करते हैं, जो स्टैटिस्टिकल एनालिटिक्स के बजाय सहज ज्ञान और तुरंत गेम अवेयरनेस पर निर्भर करता है. उनकी आउट ऑफ बॉक्स सोच स्टाइल की आलोचना भी होती है लेकिन उनका यह सोच ही उन्हें दूसरों से अलग बनाताया है. गंभीर की सोच यह है कि ग्रोथ तभी आती है जब आप ज़रूरत पड़ने पर बहुत ज़्यादा एग्रेसिव और डिफेंसिव दोनों तरह से खेल सकें. गंभीर ने अपनी कोचिंग में यह कर दिखाया है.
टीम के सभी खिलाड़ियों के योगदान को अहम बताना
वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच के दौरान गंभीर ने सिर्फ संजू सैमसन की पारी को नहीं बल्कि शिवम दुबे की पारी को भी अहम बताया. गौतम गंभीर ने ज़ोर देकर कहा कि "यह भारतीय टीम व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज़्यादा सामूहिक असर को महत्व देती है. उन्होंने कहा कि शिवम दुबे की दो अहम बाउंड्री भी उतनी ही मायने रखती थीं, जितनी संजू सैमसन की 97 रन की पारी.' गंभीर की यह सोच टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों में जोश भरती है. गंभीर की यह रणनीति टीम को बड़ा अवसर प्रदान कर रही है.
डगआउट में लगातार एग्रेसिव
गंभीर की कोचिंग में उनका आक्रामक दृष्टिकोण सबसे अहम है. मैचों के दौरान गंभीर डगआउट में बैठकर रणनीति बनाते हैं और खिलाड़ियों से इशारे-इशारे में बात करते हैं, कई बार गंभीर को मैच के दौरान आक्रामक देखा गया है.
ब्रेंडन मैकुलम बतौर कोच
आक्रामक क्रिकेट खेलना
मेंटल फ्रीडम: मैकुलम की "बैज़बॉल" स्ट्रैटेजी का मेन मकसद प्लेयर्स को फेल होने के साइकोलॉजिकल डर से आज़ाद करना है उनकी टैक्टिक्स में अनकन्वेंशनल फील्ड सेटिंग्स (जैसे, लेग स्लिप्स, स्क्वायर के सामने तीन आदमी) और एग्रेसिव बॉलिंग चेंज शामिल हैं जो सिर्फ रन बचाने के बजाय विकेट लेने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. इसके अलावा मैकुलम एक ऐसे कोच रहे हैं जो नकारात्मक बातचीत'से बचते हैं और टीम के खिलाड़ी और कप्तान के सामने हमेशा सकारात्मक सोच रखते हैं. ड्रेसिंग रूम का माहौल बहुत हल्का और खुशनुमा रखते हैं.
खिलाड़ियों को देते हैं सुरक्षा
मैकुलम की कोचिंग में एक और बड़ी बात ये है कि वो अपने खिलाड़ियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं, अगर कोई बल्लेबाज गलत शॉट खेलकर आउट होता है तो तो उसे आलोचना के बजाय सपोर्ट करते हैं, मैकुलम खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बनाए रखने में विश्वास रखते हैं.
डगआउट में कम एग्रेसिव
मैकुलम मैच के दौरान शांत भाव से अपनी रणनीति को अंजाम देने पर विश्वास करते हैं. ऐसा काफी कम बार देखा गया है जब डगआउट में मैकुलम जोश में नजर आए हैं और खिलाड़ियों से आक्रामक तरीके से बात की हो.
दोनों कोच वानखेड़े स्टेडियम में T20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे. यह देखना दिलचस्प होगा कि गंभीर की ऱणनीति और मैकुलम की रणनीति में किस कोच की रणनीति आज अपना असर दिखाएगी और टीम को फाइनल में पहुंचाएगी.
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