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पाकिस्तान पर मंडरा रहा 50 साल में सबसे बड़ा कलंक, जानें इंग्लैंड दौरे में 10 सबसे बड़ी हार झेलने वाली टीम

पाकिस्तान टीम एजबस्टन में हार टालने के लिए जूझ रही है. और अब यहां से बड़ा सवाल यही है कि क्या वह पिछले 50 साल में इंग्लैंड धरती पर सबसे बड़ी हार से बच पाएगी

पाकिस्तान पर मंडरा रहा 50 साल में सबसे बड़ा कलंक, जानें इंग्लैंड दौरे में 10 सबसे बड़ी हार झेलने वाली टीम
Eng vs Pak: पाकिस्तान का एजबस्टन में बचना मुश्किल दिखाई पड़ रहा है
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पाकिस्तान की क्रिकेट संभवत: क्रिकेट बाजार से न्यूनतम स्तर पर है. और 'शेयर' मानो कौड़ियों के भाव हो चला है. इंग्लैंड में हाल ही में जो हुआ, उसके लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की दुनिया भर में थू-थू हो रही है, तो बल्लेबाजों का क्या हाल है, यह इंग्लिश पूर्व कप्तान नाहिर हुसैन के सैम अयूब पर किए कमेंट से साफ समझा जा सकता है. बहरहाल, इंग्लैंड दौरे के दौरान पाकिस्तान की टीम जिस तेजी से नीचे गिरी है, उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. टीम पिछले आधी सदी (50 वर्षों) में इंग्लैंड दौरा करने वाली सबसे खराब विदेशी टीम के रूप में दर्ज होने की राह पर है. 

पिछले 50 वर्षों में इंग्लैंड का अपने घर में सबसे खराब दौर भी शामिल है, जब वे 1976 और 1988 के बीच वेस्टइंडीज को, 1989 और 2001 के बीच ऑस्ट्रेलिया को, और 1987 और 2001 के बीच पाकिस्तान को हराने में नाकाम रहे थे. हालांकि, 21वी शताब्दी (साल 2000 के बाद) उनकी ताकत बढ़ी और विदेशी टीमों के लिए यहां राह मुश्किल होती गई. इस सूची की 10 में से 8 हार पिछले 22 वर्षों की हैं. चलिए आप बारी-बारी से इंग्लैंड में पिछले 50 साल में सबसे खराब  टेस्ट दौरों के बारे में जान लें

10. ऑस्ट्रेलिया (2013): 5 टेस्ट, 2 ड्रॉ, 3 हार

इस दौरे में ऑस्ट्रेलिया ट्रेंट ब्रिज में जीत के करीब 14 रन दूर रह गया था, लेकिन लॉर्ड्स में ग्रीम स्वान (9-122) के सामने उनकी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. सीरीज में 2-0 से पिछड़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया ने दो बार पारी घोषित की, लेकिन ओल्ड ट्रैफर्ड में बारिश के कारण नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद चेस्टर-ले-स्ट्रीट में स्टुअर्ट ब्रॉड (11-121) के सामने वे दो बार ढह गए. ओवल में उन्होंने एक और साहसी घोषणा की, लेकिन जब खराब रोशनी ने खेल बिगाड़ा तब इंग्लैंड जीत से सिर्फ 21 रन दूर था.

9. ऑस्ट्रेलिया (1985): 6 टेस्ट, 1 जीत, 2 ड्रॉ, 3 हार

इसका परिणाम चार साल पहले की इयान बॉथम की एशेज सीरीज जैसा ही रहा, लेकिन क्रिकेट की गुणवत्ता वैसी बिल्कुल नहीं थी. उस समय जब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दुनिया की सबसे खराब टेस्ट टीमों में से एक थे, तब एलन बॉर्डर एक बदलाव के दौर से गुजर रही टीम की कप्तानी कर रहे थे. बॉर्डर और युवा क्रेग मैकडरमॉट के जुझारूपन ने उन्हें लॉर्ड्स टेस्ट जिताया, लेकिन ऑस्ट्रेलिया बाकी पांच टेस्ट मैचों में केवल 51 विकेट ही ले सका. वे डेविड गॉवर (81.33 की औसत से 732 रन) को रोकने में नाकाम रहे.

8. वेस्टइंडीज (2000): 5 टेस्ट, 1 जीत, 1 ड्रॉ, 3 हार

वेस्टइंडीज ने 1969 के बाद से इंग्लैंड में कोई सीरीज नहीं गंवाई थी और वे सही राह पर लग रहे थे जब उन्होंने एजबेस्टन टेस्ट पारी से जीता और लॉर्ड्स में 133 रनों की बढ़त हासिल की. लेकिन एंडी कैडिक (5-16) ने उन्हें 54 रनों पर समेट दिया और यहां से सब कुछ बिगड़ता चला गया. ओल्ड ट्रैफर्ड में बारिश ने परिणाम नहीं आने दिया, जिसके बाद हेडिंग्ले में वेस्टइंडीज फिर से कैडिक (5-14) के सामने 61 रन और द ओवल में क्रेग व्हाइट (5-32) के सामने 125 रन पर सिमट गया और विस्डन ट्रॉफी पर अपना 31 साल पुराना दबदबा गंवा बैठा.

7. वेस्टइंडीज (2024): 3 टेस्ट, 3 हार

इतना कमजोर समर्पण इस सूची में और ऊपर होना चाहिए था, लेकिन 2024 तक किसी को वेस्टइंडीज से विदेशी सरजमीं पर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी. वे छह पारियों में से चार बार 200 के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके और तीन में से केवल एक टेस्ट में 10 से ज्यादा विकेट ले पाए. ट्रेंट ब्रिज में कावेम हॉज का शतक ही उनका एकमात्र सकारात्मक पहलू था.

6. भारत (2014): 5 टेस्ट, 1 जीत, 1 ड्रॉ, 3 हार

सीरीज के दो टेस्ट मैचों के बाद, रवींद्र जडेजा और जेम्स एंडरसन के बीच विवाद के बीच भारत 1-0 से आगे चल रहा था, लेकिन इसके बाद हार का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि कोई भूल ही गया कि दौरे की शुरुआत कैसी हुई थी. भारत लगातार पांच बार 200 से कम के स्कोर पर ऑलआउट हुआ, जिसका अंत द ओवल में 94 रन पर आउट होने के साथ हुआ. वे इन्हीं तीन टेस्ट मैचों में केवल 31 विकेट ही हासिल कर सके.

5. श्रीलंका (2016): 3 टेस्ट, 1 ड्रॉ, 2 हार

दो साल पहले इंग्लैंड में श्रीलंका ने अब तक की सबसे महान दो-टेस्ट मैचों की सीरीज जीती थी. लेकिन वे उम्मीदें तब धरी की धरी रह गईं जब वे अपनी पहली तीन पारियों में 91, 119 और 101 रन पर ढेर हो गए. श्रीलंका ने दूसरे टेस्ट में पारी की हार को टाला और तीसरे टेस्ट में बारिश ने उन्हें बचा लिया. उनके खिलाड़ी चोटिल हुए, कैच छूटे, शमिंदा एरंगा के बॉलिंग एक्शन की रिपोर्ट हुई और नुवान प्रदीप को एक नो-बॉल पर विकेट मिला. इसके लिए अंपायर रॉड टकर ने माफी मांगी. यह पूरा दौरा एक अव्यवस्था जैसा था.

4. पाकिस्तान (2006): 4 टेस्ट, 1 ड्रॉ, 3 हार (1 हार जब्ती के कारण)

यह सीरीज ओवल में पाकिस्तान द्वारा मैच छोड़ने के लिए याद की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप डारेल हेयर को आईसीसी पैनल से हटा दिया गया था (और निश्चित रूप से, इनज़माम-उल-हक़ के हिट-विकेट आउट होने के लिए). लेकिन उस टेस्ट ने इस बात को भी छिपा दिया कि लॉर्ड्स में ड्रॉ कराने के बाद मेहमान टीम कितनी साधारण दिख रही थी. यह 2006 का दौर था. मोहम्मद यूसुफ (90.14 की औसत से 631 रन) शानदार फॉर्म में थे, लेकिन हेडिंग्ले में यूनिस खान के 173 रनों के अलावा स्टीव हार्मिसन और मोंटी पनेसर के सामने सपाट पिचों पर उन्हें अन्य बल्लेबाजों से बहुत कम सहयोग मिला.

3. वेस्टइंडीज (2004): 4 टेस्ट, 4 हार

चार साल पहले विस्डन ट्रॉफी वापस पाने के बाद इंग्लैंड की नई पीढ़ी ने अब वैसी ही हार का बदला लिया जैसा वे 1980 के दशक में झेला करते थे. हार का अंतर  (210 रन, 256 रन, सात विकेट, 10 विकेट)  सब कुछ बयां करता है. शिवनारायण चंद्रपॉल अपने सर्वश्रेष्ठ जुझारू रूप में थे और क्रिस गेल ने दोनों विभागों में योगदान दिया. लेकिन ब्रायन लारा के रन न बना पाने और कर्टली एम्ब्रोस व कोर्टनी वॉल्श की जगह लेने के लिए किसी के आगे न आने से परिणाम पहले से ही तय था.

2. भारत (2011): 4 टेस्ट, 4 हार

नये-नये वनडे विश्व चैंपियन बने भारत की बेबसी को इस दौरे की दो घटनाएं बयां करती हैं. पहली, जब लॉर्ड्स में दूसरी सुबह केविन पीटरसन काउंटर-अटैक कर रहे थे, तो एमएस धोनी गेंदबाजी करने के लिए अपने पैड उतारने लगे. और दूसरी यह कि अंतिम टेस्ट शुरू होने तक भारत को मियामी में छुट्टियां मना रहे स्पष्ट रूप से अनफिट आरपी सिंह को बुलाना पड़ा, जिन्होंने लेग-साइड से बाहर धीमी मध्यम गति से गेंदबाजी शुरू की. इंग्लैंड ने चार में से दो टेस्ट पारी के अंतर से जीते. राहुल द्रविड़ के शतकों ने बाकी दो मैचों की हार के अंतर को 196 रन और 319 रन तक सीमित रखा.

1. ऑस्ट्रेलिया (1977): 5 टेस्ट, 2 ड्रॉ, 3 हार

दो साल पहले, ऑस्ट्रेलिया ने एशेज जीती थी और इंग्लैंड में विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया था। जब वे फिर से ब्रिटिश धरती पर लौटे, तो केरी पैकर ने क्रिकेट को पूरी तरह बदलने की शुरुआत कर दी थी . हालांकि उस समय यह बात किसी को पता नहीं थी. पहले टेस्ट से एक महीने से भी अधिक समय पहले, जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ससेक्स के खिलाफ खेल रही थी, तब 'डेली मेल' ने खबर ब्रेक की कि घरेलू कप्तान टोनी ग्रेग और 17 में से 13 मेहमान खिलाड़ियों ने पहले ही अनुबंध कर लिया था. अगली सुबह, ऑस्ट्रेलियाई समाचार पत्रों ने भी इसे छाप दिया।

यदि ऑस्ट्रेलियाई टीम लड़ाई लड़ती तो टेस्ट सीरीज को कुछ तवज्जो मिल सकती थी. लेकिन मेहमान टीम, जिनमें से लगभग किसी को नहीं पता था कि वे ऑस्ट्रेलिया के लिए फिर से खेलेंगे या नहीं, बुरी तरह असफल रही. नए कप्तान माईक बियरली के नेतृत्व में, इंग्लैंड को लॉर्ड्स में बारिश ने रोक दिया, लेकिन एशेज वापस पाने के लिए उसने अगले तीनों टेस्ट मैचों को बड़े अंतर से जीता.


क्या बड़े कलंक से खुद को पाएगा पाकिस्तान? 

विश्व युद्धों के बाद से कोई भी पुरुष टेस्ट टीम कम से कम एक बार 200 के स्कोर तक पहुंचे बिना इंग्लैंड से वापस नहीं लौटी है. यदि पाकिस्तान इस शर्मनाक स्थिति का शिकार होता है, तो वे इस सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच सकते हैं. लेकिन फिर भी वे स्थिति को पलट सकते हैं. एजबेस्टन में जीत दर्ज कर सकते हैं और इस दिखाई पड़ रहे संभावित कलंक से बच सकते हैं. लेकिन एजबस्टन टेस्ट के तीसरे दिन खबर लिखे जाने तक तो यही लग रहा है कि पाकिस्तान खुद को सूपड़ा होने से नहीं बचा पाएगा.

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