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CSK vs GT: आखिरी मैच में हार के साथ ही बेआबरू होकर बाहर निकली चेन्नई, इन 5 बड़ी वजहों ने किया बंटाधार

CSK 5 Major Reasons Led to Ruin in IPL 2026: इस सीजन में खराब कप्तानी और कमजोर रणनीति से लेकर अनुभवहीन खिलाड़ियों के लचर प्रदर्शन तक, जानिए उन 5 बड़ी वजहों के बारे में जिसने इस साल चेन्नई सुपर किंग्स का पूरी तरह बेहाल कर दिया.

CSK vs GT: आखिरी मैच में हार के साथ ही बेआबरू होकर बाहर निकली चेन्नई, इन 5 बड़ी वजहों ने किया बंटाधार
CSK 5 Major Reasons Led to Ruin in IPL 2026: 

CSK 5 Major Reasons Led to Ruin in IPL 2026: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के फैंस के लिए आईपीएल 2026 का अंत बेहद दर्दनाक और शर्मनाक रहा है. गुरुवार को खेले गए सीजन के 66वें मुकाबले में गुजरात टाइटंस (GT) ने चेन्नई को 89 रनों के विशाल अंतर से करारी शिकस्त दी. इस हार के साथ ही पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स इस सीजन में प्लेऑफ की दौड़ से बाहर होने वाली तीसरी टीम बन गई है. चेन्नई से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स और मुंबई इंडियंस की टीम इस रेस से बाहर हो चुकी थीं, जबकि बेंगलुरु, गुजरात और हैदराबाद पहले ही प्लेऑफ का टिकट पक्का कर चुकी हैं.

इस मुकाबले में नरेंद्र मोदी स्टेडियम में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी गुजरात टाइटंस ने टॉप ऑर्डर के शानदार प्रदर्शन की बदौलत 4 विकेट खोकर 229 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया. जवाब में रनों के इस विशाल दबाव के आगे चेन्नई की टीम पूरी तरह बिखर गई और महज 13.4 ओवरों में 140 रन पर सिमट गई. टीम को पहली ही गेंद पर संजू सैमसन (0) के रूप में बहुत बड़ा झटका लगा. कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ (16 रन) ने मैथ्यू शॉर्ट (24 रन) के साथ मिलकर 29 रनों की साझेदारी कर टीम को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन कप्तान के आउट होते ही पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई. कार्तिक शर्मा ने भी 19 रन बनाए, लेकिन वे हार को टाल नहीं सके. चेन्नई की टीम इस सीजन के 14 मैचों में से सिर्फ 6 मुकाबले ही जीत सकी और 12 अंकों के साथ प्वाइंट्स टेबल में सातवें पायदान पर रहकर सफर खत्म किया.

आइए जानते हैं उन 5 बड़ी वजहों के बारे में जिन्होंने इस सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स का पूरी तरह बंटाधार कर दिया.

1. ठोस रणनीति का पूरी तरह अभाव

इस पूरे सीजन के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स की टीम मैदान पर बिना किसी ठोस प्लानिंग और रणनीति के उतरती हुई दिखाई दी. विरोधी टीम के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के खिलाफ मैच के दौरान रणनीतियों में जो लचीलापन होना चाहिए था, वह चेन्नई के खेमे में नजर नहीं आया. विकेट के मिजाज को भांपने और उसके हिसाब से मैच को चलाने में मैनेजमेंट और टीम बुरी तरह असफल रही.

2. टॉप ऑर्डर की लगातार विफलता

टी20 क्रिकेट में पावर-प्ले और टॉप ऑर्डर की शुरुआत सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इस पूरे टूर्नामेंट में चेन्नई का टॉप ऑर्डर रन बनाने के लिए जूझता रहा. आखिरी करो या मरो वाले मुकाबले में भी जब टीम को 230 रनों की जरूरत थी, तब संजू सैमसन पहली ही गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गए. कप्तान गायकवाड़ और मैथ्यू शॉर्ट भी अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए. टॉप ऑर्डर की इस नाकामी ने मिडिल ऑर्डर पर इतना दबाव बना दिया कि टीम कभी उससे उबर ही नहीं पाई.

3. ट्रांजिशन और कॉम्बिनेशन की उलझन

टीम इस सीजन में नए और पुराने खिलाड़ियों के बीच सही तालमेल (कॉम्बिनेशन) बिठाने में पूरी तरह उलझी रही. मैच के बाद खुद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ का दर्द भी छलक उठा. गायकवाड़ ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि रामकृष्णा घोष और क्रेग ओवर्टन के अचानक टीम से बाहर जाने की वजह से पूरी टीम का संतुलन व्यवस्थित नहीं रह पाया और वे पूरी तरह बिखर गए. इन दोनों खिलाड़ियों के जाने से टीम कॉम्बिनेशन में एक प्रमुख गेंदबाज और एक उपयोगी बल्लेबाज की बड़ी कमी हो गई, जिसकी भरपाई टीम आखिरी समय तक नहीं कर सकी.

4. अनुभवहीन मिडिल ऑर्डर का न चलना

चेन्नई सुपर किंग्स की इस सीजन में सबसे कमजोर कड़ी उसका अनुभवहीन मिडिल ऑर्डर साबित हुआ. आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल टीम के मिडिल ऑर्डर में खेलने वाले लगभग 8 से 10 खिलाड़ी ऐसे थे जिन्हें आईपीएल में 20 मैचों से भी कम खेलने का अनुभव था. इस अनुभवहीनता का नतीजा यह हुआ कि जब भी टॉप ऑर्डर फेल हुआ, मिडिल ऑर्डर के युवा खिलाड़ी दबाव को झेल नहीं पाए और गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलकर अपने विकेट गंवाते रहे.

5. बेअसर गेंदबाजी और बड़े अंतर से हार (NRR का कबाड़ा)

चेन्नई के गेंदबाज न तो पावर-प्ले में विपक्षी टीम पर अंकुश लगा पाए और न ही डेथ ओवरों में रनों की रफ्तार को रोक सके. गुजरात के खिलाफ भी गेंदबाजों ने खुलकर रन लुटाए और 229 रन बनवा दिए. गेंदबाजों के इस बेअसर प्रदर्शन के कारण टीम को इस सीजन में कई अहम मौकों पर बहुत बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा. इन बड़ी हारों का सबसे बुरा असर चेन्नई के नेट रन-रेट (NRR) पर पड़ा, जिसने टीम के क्वालीफाई करने के गणित को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया.

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