
नई दि्ल्ली:
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड और निम्बस कम्युनिकेशन्स के बीच 1600 करोड़ रुपये का करार रद्द किए जाने को लेकर उपजे विवाद में बीसीसीआई के दावे को देखते हुए सोमवार को तीन राष्ट्रीयकृत बैंकों से 400 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा।
न्यायमूर्ति आफताब आलम और रंजना देसाई ने पंजाब नेशनल बैक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को बांबे उच्च न्यायालय रजिस्ट्री में 15 दिन के अंदर धनराशि जमा करने के लिए कहा। यह राशि बाद में बीसीसीआई के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला बीसीसीआई की विशेष अनुमति याचिका पर दिया है।
बैंकों ने 1600 करोड़ रुपये की धनराशि अदा करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बीसीसीआई ने यह याचिका दायर की थी। बीसीसीआई की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने कहा कि यह मसला चार साल पुरोन मीडिया अधिकार लाइसेंस करार को लेकर जो बीसीसीआई और निम्बस के बीच 2009 में एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2014 तक भारत में होने वाले सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रसारण के संबंध में था।
बीसीसीआई ने हालांकि दिसंबर 2011 में भुगतान नहीं करने के कारण निम्बस को दिए गए घरेलू प्रसारण अधिकार समाप्त कर दिए थे। बोर्ड ने इसके बाद गारंटी राशि लेने की अपील की लेकिन बैंकों ने उसे देने से इनकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति आफताब आलम और रंजना देसाई ने पंजाब नेशनल बैक, इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को बांबे उच्च न्यायालय रजिस्ट्री में 15 दिन के अंदर धनराशि जमा करने के लिए कहा। यह राशि बाद में बीसीसीआई के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला बीसीसीआई की विशेष अनुमति याचिका पर दिया है।
बैंकों ने 1600 करोड़ रुपये की धनराशि अदा करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद बीसीसीआई ने यह याचिका दायर की थी। बीसीसीआई की तरफ से उपस्थित वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने कहा कि यह मसला चार साल पुरोन मीडिया अधिकार लाइसेंस करार को लेकर जो बीसीसीआई और निम्बस के बीच 2009 में एक अप्रैल 2010 से 31 मार्च 2014 तक भारत में होने वाले सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के प्रसारण के संबंध में था।
बीसीसीआई ने हालांकि दिसंबर 2011 में भुगतान नहीं करने के कारण निम्बस को दिए गए घरेलू प्रसारण अधिकार समाप्त कर दिए थे। बोर्ड ने इसके बाद गारंटी राशि लेने की अपील की लेकिन बैंकों ने उसे देने से इनकार कर दिया था।
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