तमिलनाडु में शराब और बीयर पीने वालों की जेब पर जल्द असर पड़ सकता है. राज्य सरकार TASMAC की दुकानों पर बिकने वाली शराब और बीयर की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है. इस पर अगले 2 दिनों में आधिकारिक घोषणा हो सकती है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नई कीमतें अगले हफ्ते से पूरे राज्य में लागू हो सकती हैं.
10 से 50 रुपए तक बढ़ सकती है कीमत
तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (TASMAC) राज्य में शराब बेचने वाली एकमात्र सरकारी संस्था है. फिलहाल पूरे तमिलनाडु में इसकी 4,048 दुकानें चल रही हैं. इन दुकानों पर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर, वाइन और इम्पोर्टेड शराब बेची जाती है. इनकी बिक्री से राज्य सरकार को हर दिन औसतन 150 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है.
यह सरकार के लिए कमाई के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है. TASMAC अधिकारियों के मुताबिक, अगर प्रस्ताव लागू होता है तो सामान्य और मिड-रेंज शराब ब्रांडों के साथ-साथ बीयर की कीमत प्रति बोतल 10 रुपए से 50 रुपए तक बढ़ सकती है. यह बढ़ोतरी अलग-अलग ब्रांड और कैटेगरी के हिसाब से होगी. इसमें व्हिस्की, ब्रांडी, रम और वोडका जैसे लोकप्रिय IMFL ब्रांड भी शामिल हो सकते हैं.
अगले कुछ दिनों में हो सकता है अंतिम फैसला
हाल ही में TASMAC प्रबंधन बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस पर अभी भी विचार चल रहा है. सूत्रों के मुताबिक, बुधवार या गुरुवार को एक हाई-लेवल बैठक हो सकती है. इसी बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा. इसके बाद सरकार आधिकारिक घोषणा कर सकती है. अगर यह फैसला लागू होता है, तो 1 फरवरी 2024 के बाद तमिलनाडु में शराब की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी होगी.
कंपनियां लंबे समय से कर रही हैं कीमत बढ़ाने की मांग
अधिकारियों के मुताबिक, शराब और बीयर बनाने वाली कंपनियां काफी समय से कीमतें बढ़ाने की मांग कर रही हैं. उनका कहना है कि राज्य सरकार IMFL और बीयर की हर खेप यानी हर कार्टन पर अतिरिक्त शुल्क लेती है. इससे उनकी लागत काफी बढ़ गई है. कंपनियों का कहना है कि पहले ही प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन का खर्च बढ़ चुका है. ऊपर से अतिरिक्त शुल्क लगने से आर्थिक बोझ और बढ़ गया है. इसलिए वे खुदरा कीमतें बढ़ाने की मांग कर रही हैं, ताकि बढ़ी हुई लागत की भरपाई हो सके.
निजी कंपनियों को बिक्री देने का प्रस्ताव भी आया, लेकिन नहीं बनी बात
सरकार ने शुरुआत में कंपनियों की मांग स्वीकार नहीं की थी. बाद में इस मुद्दे पर TASMAC प्रबंधन समिति में विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में भविष्य में शराब की खुदरा बिक्री निजी कंपनियों को देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया. लेकिन वित्त विभाग ने इसका विरोध किया. विभाग का मानना है कि अगर निजी कंपनियों को शराब की खुदरा बिक्री की अनुमति दी गई, तो इससे राज्य सरकार को शराब से मिलने वाले राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
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