मध्य-पूर्व एशिया में गहराते सामरिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है. अमेरिका द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर 15 युद्धपोत तैनात करने और ईरान के साथ बातचीत विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है. इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जहां इंडियन बास्केट (Indian Basket) कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं.
दुनियाभर के तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रूट से गुजरता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी के फैसले से सऊदी अरब भी चिंतित है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (Wall Street Journal) के अनुसार, सऊदी अरब अमेरिका पर नाकाबंदी हटाने का दबाव बना रहा है, क्योंकि उसे डर है कि ईरान जवाबी कार्रवाई में अन्य समुद्री मार्गों को भी बाधित कर सकता है, जिससे तनाव और बढ़ेगा.
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भारतीय बास्केट का बिगड़ता गणित
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति बाधित होने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ गया है:
ताजा कीमतें: 10 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 116.26 अमेरिकी डॉलर (US$) प्रति बैरल रही.
अप्रैल का औसत: अप्रैल 2026 के पहले दस दिनों में यह औसत बढ़कर 123.24 अमेरिकी डॉलर (US$) प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
भारी बढ़ोतरी: फरवरी 2026 में कीमत महज 69.01 अमेरिकी डॉलर (US$) थी. यानी पिछले दो महीनों में तेल 68.46 प्रतिशत (प्रतिशत) महंगा हो चुका है.
सरकार बनाम राज्यों का टैक्स गणित
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को थामने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी. सरकार ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए अपने टैक्सेशन रेवेन्यू (Taxation Revenues) का त्याग किया, लेकिन राज्यों की ओर से वैट (VAT/Sales Tax) में कोई कमी नहीं की गई है.
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राज्यों की कमाई का आंकड़ा:
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक राज्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों से मोटी कमाई की है:
वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2024-25: राज्यों का कुल सेल्स टैक्स/वैट (Sales Tax/VAT) कलेक्शन 3,02,058.5 करोड़ रुपये था.
वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2025-26 (पहली छमाही - H1): राज्यों ने पेट्रोलियम, ऑयल और लुब्रिकेंट्स (POL) उत्पादों से 1,46,892 करोड़ रुपये जुटाए.
विमानन क्षेत्र पर भी असर
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 1 अप्रैल, 2026 को राज्यों से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर वैट कम करने की अपील की थी, ताकि हवाई सफर आम आदमी की पहुंच से बाहर न हो. हालांकि, राज्यों की तरफ से अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो केंद्र सरकार को तेल कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने के लिए एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ सकता है.
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