Stock Market Crash: मिडिल ईस्ट में जारी जंग ने बाजार में तबाही मचा रखी है. जंग के बीच पैदा हुए एनर्जी संकट और उथल-पुथल के चलते दुनियाभर के शेयर मार्केट का बुरा हाल है. सोमवार को जब भारतीय शेयर बाजार खुले तो एक बार फिर इसका असर देखा गया और बाजार बंद होते-होते निवेशकों के पोर्टफोलियो में 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट आ गई. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स और निफ्टी में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 1635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ, 50 शेयरों वाला NSE निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत गिरकर 22,331.40 पर बंद हुआ. निवेशकों के पोर्टफोलियो में नौ लाख करोड़ रुपये की कमी आई.
बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
- सबसे बड़ा कारण अमेरिका-ईरान युद्ध है, जो एक महीने से ज्यादा समय से जारी है और अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर गया है. इस युद्ध के खत्म होने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला बढ़ाया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है. इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों के शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है.
- दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर असर के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, अपनी 85-90 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है; ऐसे में महंगा तेल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालता है.
- तीसरा कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है. वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया वीआईएक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 28.1 के पार पहुंच गया, जो यह दिखाता है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता बढ़ रही है. आमतौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने पर बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका रहती है.
- चौथा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में 27 तारीख तक भारतीय बाजार से 1.23 लाख करोड़ रुपए निकाल लिए हैं. इससे बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है.
- पांचवां कारण एफएंडओ (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी है. 30 मार्च को मार्च सीरीज के कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहे हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी रह सकती है. हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है.
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