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'नरसंहार में मदद' के आरोप पर चौंका माइक्रोसॉफ्ट! कर्मचारी के इस्तीफे के बाद कंपनी को देनी पड़ी सफाई

लोगों की जासूसी के दावों और कंपनी के युद्ध में मदद करने के आरोपों को खारिज करते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी सफाई में क्या-क्या कहा, आइए विस्तार से जानते हैं.

'नरसंहार में मदद' के आरोप पर चौंका माइक्रोसॉफ्ट! कर्मचारी के इस्तीफे के बाद कंपनी को देनी पड़ी सफाई
'नरसंहार' के आरोपों पर माइक्रोसॉफ्ट में बगावत! कर्मचारी का इस्तीफा, कंपनी ने जासूसी के दावों को नकारा

Business News: दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) इन दिनों गंभीर आरोपों से घिरी हुई है. यह आरोप किसी बाहर वाले ने नहीं, बल्कि कंपनी के ही एक पूर्व कर्मचारी ने लगाए हैं. कर्मचारी का दावा है कि कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी और डेटा सेंटर्स के जरिए फिलिस्तीन में हो रहे 'नरसंहार' में मदद कर रही है. इस आरोप के बाद टेक जगत में हड़कंप मच गया है और माइक्रोसॉफ्ट को खुद आगे आकर सफाई देनी पड़ी है.

'हजारों कर्मचारियों को भेजा इस्तीफे वाला ईमेल'

इटली में माइक्रोसॉफ्ट के डेटा सेंटर में लगभग दो साल तक 'क्रिटिकल एनवायरनमेंट टेक्नीशियन' के तौर पर काम करने वाले नूर (Nour) नाम के कर्मचारी ने 26 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन उनके इस्तीफे का तरीका बेहद चौंकाने वाला था. नूर ने यूरोप में काम करने वाले माइक्रोसॉफ्ट के हजारों कर्मचारियों को एक साथ ईमेल भेजा. इस ईमेल में उन्होंने कंपनी पर आरोप लगाया कि वह इजरायली सेना के सर्विलांस ऑपरेशन्स में सीधे तौर पर मदद कर रही है, जिसका निशाना फिलिस्तीनी लोग बन रहे हैं.

11 हजार 500 TB का यूज करके की गई एयर स्ट्राइक

नूर ने अपनी चिट्ठी में साल 2025 की कुछ रिपोर्ट्स का हवाला दिया. उनका दावा है कि नीदरलैंड और आयरलैंड में मौजूद माइक्रोसॉफ्ट के डेटा सेंटर्स में फिलिस्तीनियों की फोन कॉल का करीब 11,500 टेराबाइट (TB) डेटा स्टोर किया गया था. आरोप है कि इस डेटा का इस्तेमाल इजरायली सेना ने लोगों की जासूसी करने, उन्हें निशाना बनाने और यहां तक कि एयरस्ट्राइक करने के लिए किया. नूर का कहना है कि जब इस जासूसी प्रोग्राम का भंडाफोड़ हुआ, तो माइक्रोसॉफ्ट ने रातों-रात इस डेटा को नीदरलैंड से हटाकर इजरायल के सर्वर्स पर ट्रांसफर कर दिया, ताकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जांच से बचा जा सके.

'अल-मुनस्सिक' ऐप को लेकर भी उठाए सवाल

पूर्व कर्मचारी ने आयरलैंड के सर्वर पर होस्ट किए गए अल-मुनस्सिक (Al-Munasseq) ऐप पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं. फिलिस्तीनियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए परमिट लेने वास्ते यह ऐप डाउनलोड करना पड़ता है. आरोप है कि यह ऐप लोगों के फोन का पूरा कंट्रोल ले लेता है- जैसे पर्सनल फाइलें पढ़ना, मैसेज देखना और फोन को अपनी मर्जी से कंट्रोल करना. नूर का कहना है कि आयरलैंड जैसे देश में इस ऐप को होस्ट करना शर्मनाक है, क्योंकि आयरलैंड का खुद का इतिहास कब्जे और भुखमरी का रहा है.

'इजरायल के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का दवाब बनाएं'

नूर ने अपने ईमेल में सिर्फ आरोप नहीं लगाए, बल्कि अपने साथियों से भी एक खास अपील की है. उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट हमारे काम और धरती के संसाधनों का इस्तेमाल जंग का मुनाफा कमाने के लिए कर रहा है. नूर ने साथी कर्मचारियों से No Azure for Apartheid अभियान से जुड़ने और कंपनी पर इजरायली सरकार के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का दबाव बनाने को कहा है. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल कर्मचारियों के विरोध के कारण ही कंपनी ने इजरायली सैन्य एजेंसी (यूनिट 8200) के साथ एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया था.

आरोपों पर क्या है माइक्रोसॉफ्ट की सफाई?

इन गंभीर आरोपों के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने सामने आकर अपनी बात रखी है. कंपनी ने आम नागरिकों की जासूसी में मदद करने के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने कहा कि 2025 में आई रिपोर्ट्स के बाद कंपनी ने आंतरिक जांच करवाई थी और बाद में कानूनी समीक्षा भी की गई. जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि उनकी एज़्योर (Azure) क्लाउड सर्विस का इस्तेमाल आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया हो. हालांकि, कंपनी ने यह जरूर माना कि उन्होंने इजरायल के रक्षा मंत्रालय की एक यूनिट को दी जाने वाली कुछ सर्विस बंद कर दी हैं. कंपनी का साफ कहना है कि वह जानबूझकर कभी ऐसी टेक्निक नहीं देती जिससे नागरिकों की जासूसी हो और उनका सारा काम उनकी पॉलिसियों के दायरे में ही होता है.

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