मौजूदा वित्त वर्ष में देश का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 8 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. केंद्र सरकार ने मंगलवार को डेटा जारी कर बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक यानी 1 अप्रैल से 10 अगस्त तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर 23% बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है.
इस दौरान कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सालाना आधार पर 19.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 9.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि समीक्षा अवधि में जारी किए गए रिफंड का आंकड़ा 1.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 3.79 प्रतिशत अधिक हैं.
रिफंड से पहले कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन, पिछले साल 10 अगस्त तक 7.97 लाख करोड़ रुपये था, जो अब 1.57 लाख करोड़ रुपये बढ़कर इस स्तर पर पहुंच गया है.
कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन कितना बढ़ा?
समीक्षा अवधि में शुद्ध कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन पिछले साल के 2.26 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.70 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि शुद्ध नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 4.11 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये हो गया.
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) से शुद्ध संग्रह बढ़कर 33,823.74 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 22,354.31 करोड़ रुपये था.
पिछले साल की इसी अवधि में कुल कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 3.32 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 3.80 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कुल नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 4.43 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 5.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि कुल एसटीटी संग्रह 22,354.31 करोड़ रुपये से बढ़कर 33,823.74 करोड़ रुपये हो गया.
अन्य टैक्स का कुल संग्रह 14.33 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 282.96 करोड़ रुपये था.
इन आंकड़ों में कंपनियों के साथ-साथ व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF), फर्मों, लोगों के संघों, व्यक्तियों के निकायों, स्थानीय प्राधिकरणों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्तियों द्वारा चुकाए गए टैक्स शामिल हैं.
राजकोषीय घाटा के बारे में भी जान लें
इस बीच, 31 जुलाई को कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भारत का अनुमानित राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) 3.1 लाख करोड़ रुपये था, जो पूरे साल के बजट अनुमान का 18.2 प्रतिशत है.
यह राजकोषीय अंतर पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि के दौरान दर्ज 2.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, जो सरकारी खर्च में बढ़ोतरी को दर्शाता है, जबकि टैक्स कलेक्शन मजबूत बना रहा.
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